PFI Case: प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। दिल्ली स्थित विशेष अदालत ने संगठन के चेयरमैन ओएमए सलाम, उपाध्यक्ष ईएम अबूबकर समेत कुल 21 आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और गैरकानूनी गतिविधियां निरोधक कानून के तहत विभिन्न आरोपों को सुनवाई योग्य माना है।
आतंकवादी गतिविधियों और धन जुटाने के आरोप
राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने, प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने, लोगों की भर्ती करने और कथित साजिशों को अंजाम देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि संगठन का शीर्ष नेतृत्व इन गतिविधियों के संचालन और विस्तार में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। अदालत ने मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद आरोप तय करने का निर्णय लिया। अब मामले की अगली सुनवाई दस जुलाई को निर्धारित की गई है।
PFI Case: अदालत की टिप्पणी से बढ़ी गंभीरता
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि संगठन और उसके वरिष्ठ पदाधिकारी भारत की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को कमजोर करने की कथित योजना में शामिल थे। अदालत के अनुसार, जांच में सामने आए तथ्यों से यह भी प्रतीत होता है कि संगठन विशेष वैचारिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रहा था। न्यायालय ने इस मामले को गंभीर प्रकृति का बताते हुए विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता पर बल दिया।
दो हजार बाईस की कार्रवाई से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला सितंबर दो हजार बाईस में देशभर में चलाए गए बड़े अभियान से जुड़ा है। उस दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर कई पदाधिकारियों और सदस्यों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठकों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे, जिनका संबंध कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से था। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ये गतिविधियां किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि संगठनात्मक स्तर पर संचालित होती प्रतीत होती हैं। अब सभी आरोपियों को अगली सुनवाई के लिए दस जुलाई को अदालत में पेश होना होगा।
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