New Delhi: राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर-मंतर पर शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विरोध-प्रदर्शन हुआ। इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने NEET पेपर लीक सहित अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि देश का युवा अब नहीं डरेगा। उन्होंने कहा, “कॉकरोच डरते भी नहीं, कभी मरते भी नहीं।”
डिजिटल आंदोलन और जमीनी हकीकत
NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी एक ऐसा संवेदनशील मुद्दा है जिस पर छात्रों और युवाओं के आक्रोश को कहीं से भी नेतृत्व मिलता तो वे जुटते ही। देश की राजनीतिक पार्टियों ने इस मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन के कार्यक्रम दिये होते तो निश्चित ही युवा और छात्र उनके आह्वान पर जुटते। कॉकरोच जनता पार्टी ने इसकी पहल की तो वे उसके बैनर तले एकजुट हुए। छात्र और युवा ही नहीं, बल्कि कुछ बुजुर्ग भी जंतर-मंतर पर दिखाई दिये, लेकिन सवाल यह है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जिसकी शुरुआत एक ‘डिजिटल आंदोलन’ या व्यंग्यात्मक मंच के तौर पर हुई वह भविष्य में एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन बन पाएगी या नहीं? क्या सोशल मीडिया पर उसकी लोकप्रियता को ही उसकी सफलता का पैमाना मान लिया जाना चाहिए? सोशल मीडिया अलग बात है और जमीन पर राजनीतिक जड़ें जमाना कुछ और बात है।
New Delhi: राजनीतिक ताकत बनने में चुनौतियां
जनता का विश्वास- कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को राजनीतिक सफर शुरू करने के साथ ही तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।सबसे पहले पार्टी का सांगठनिक ढांचा बनाने की चुनौती है। देखना होगा कि संगठन में वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध वे कौन से जिम्मेदार लोग हो सकते हैं, जो स्पष्ट सोच के साथ पार्टी को सही दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं। वैचारिक परिपक्वता के अभाव में जनता का विश्वास हासिल करना कठिन होता है।जब तक जनता को मजबूत नेतृत्व क्षमता नहीं दिखाई देती, वह विश्वास नहीं कर पाती है।
अवसरवादी घुसपैठ- एक और बड़ी चुनौती यह है कि कोई भी पार्टी जब सफल होने लगती है, तो उसमें अवसरवादी लोग घुसपैठ करने लगते हैं, आखिर पार्टी इनसे कैसे बची रहेगी? राजनीति में बहुत से ऐसे उदाहरण हैं, जब अवसरवादी लोग संगठनों में घुस गए।अगर इस पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति के धरातल पर सफल होना है, तो उन अवसरवादी लोगों से बचना होगा, जिन्हें जनता ने नकार दिया हो या जो अपनी गलतियों के चलते राजनीतिक हाशिये पर फेंक दिये गये हों।ऐसे लोगों से बचे रहना बड़ी चुनौती है।प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन लोगों का समर्थन नुकसान ही पहुंचाता है।
अराजक तत्व- संगठन में अवसरवादी ही नहीं, बल्कि अराजक तत्व भी घुसपैठ कर जाते हैं। ये लोग जन आंदोलनों की पूरी मेहनत पर पानी फेर देते हैं। राजनीतिक पार्टियों के इर्द-गिर्द इनकी उपस्थिति को लोग पचा नहीं पाते हैं।
चुनाव चिन्ह- कॉकरोच जनता पार्टी के सामने एक दिक्कत चुनाव चिन्ह को लेकर भी होगी। अभी उसके प्रचार का मुख्य साधन कॉकरोच नामक जीव है, लेकिन चुनाव आयोग से यह चुनाव चिन्ह उसे मिल पाना कठिन है। लिहाजा उसे किसी अन्य चिन्ह के साथ जनता के बीच जाने को विवश होना पड़ेगा।
अगर पार्टी के संस्थापक या कर्ता-धर्ता इन चुनौतियों को गहराई से संझेंगे, तो पार्टी के लिए संभावनाएं बन सकती हैं, लेकिन यदि उनके संगठन पर देश विरोधी नारे लगाने वाले तत्वों और अवसरवादी राजनेताओं की काली छाया पड़ जाए तो फिर उसकी अकाल मौत तय है।








