New Delhi: पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद ममता बनर्जी को झटके पर झटके लग रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक और सांसद निरंतर उनका साथ छोड़ रहे हैं। पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने संसद में अलग बैठने का फैसला कर लिया है।यही नहीं ये सांसद पार्टी कार्यालय पर अपना दावा कर रहे हैं।एक तरफ ममता बनर्जी की टीएमसी का अस्तित्व खतरे में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस और भाजपा दोनों को इसका फायदा मिल रहा है।
भाजपा को फायदा
टीएमसी की टूट से बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा हुआ है। उन्हें लग रहा है कि राज्य में टीएमसी जितनी कमजोर होगी उतना अधिक वे फायदे में रहेंगे। राज्य से ज्यादा फायदा भाजपा को केंद्र में होने वाला है।दरअसल, ममता से दूर हुए सांसदों का झुकाव भाजपा की तरफ दिखाई दे रहा है। इससे भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को दोहरा फायदा होगा। एक तो सरकार की टीडीपी (TDP) और जेडीयू (JDU) जैसे सहयोगियों पर निर्भरता कम होगी और दूसरे सदन में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ और महिला आरक्षण जैसे प्रमुख संवैधानिक संशोधनों और विधेयकों को पास कराना उसके लिए आसान हो जाएगा।
कांग्रेस को फायदा
टीएमसी (TMC) की टूट का भाजपा की तरह ही कांग्रेस को भी पश्चिम बंगाल और केंद्र दोनों जगहों पर फायदा मिलने की उम्मीदें हैं।पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के कारण कांग्रेस उभर नहीं पा रही थी। राज्य में भाजपा और टीएमसी के बीच सीधा मुकाबला होने के कारण कांग्रेस और वामपंथियों को उभरने का मौका नहीं मिल पा रहा था, लेकिन अब ममता के कमजोर पड़ जाने पर राज्य में कांग्रेस एक बड़े विकल्प के तौर पर उभर सकती है।भविष्य में कांग्रेस वामपंथियों से गठबंधन कर राज्य विधानसभा चुनाव में दमदार उपस्थिति दर्ज कर सकती है।
राष्ट्रीय स्तर कांग्रेस को INDIA गठबंधन की मजबूती का फायदा मिलेगा। इस गठबंधन को मजबूत करने की जिम्मेदारी कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर है। अब तक उनके सामने एक बड़ी दिक्कत यह थी कि ममता बनर्जी उन्हें आसानी से गठबंधन का नेता स्वीकार नहीं करती, लेकिन अब राहुल के रास्ते में यह रोड़ा नहीं रहा। यही नहीं ममता बनर्जी खुद सोनिया गांधी की शरण में पहुंचकर INDIA गठबंधन को मजबूत करने की बात कर रही हैं। राहुल गांधी भी ममता बनर्जी के पक्ष में बोल रहे हैं।
अब क्या करेंगी ममता?
ममता बनर्जी की पार्टी जिस प्रकार टूट गई है, उसे देखते हुए सवाल उठना स्वाभाविक है कि अब उन्हें अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए क्या विकल्प चुनना चाहिए ? ममता के सामने एक सीधा सा विकल्प यह है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन की मजबूती के लिए पूरी ताकत के साथ जुट जाएं। कुछ राजनीतिक विश्लेषक दूसरा विकल्प यह मानते हैं कि ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस का मोह छोड़कर बचे हुए समर्थकों के साथ अपनी मूल पार्टी कांग्रेस में वापसी कर लेनी चाहिए। दोनों ही विकल्प उनके सामने हैं, अब देखना है कि वे क्या करती हैं?








