Abhishek Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव के दौरान कथित रूप से हिंसा भड़काने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने से जुड़े मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज प्रकरण की जांच अब राज्य पुलिस के आपराधिक जांच विभाग को सौंप दी गई है। इससे पहले इस मामले की जांच बिधाननगर साइबर अपराध थाना पुलिस कर रही थी।
साइबर थाने से सीआईडी को सौंपी गई जांच
राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को मामले की जांच औपचारिक रूप से आपराधिक जांच विभाग को स्थानांतरित कर दी गई। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ यह मामला पिछले महीने बिधाननगर साइबर अपराध थाने में दर्ज किया गया था। आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले आयोजित एक जनसभा में दिए गए उनके कथित बयान ने विवाद खड़ा किया था। उसी बयान के आधार पर शिकायत दर्ज हुई और बाद में प्राथमिकी भी दर्ज की गई। इस घटनाक्रम के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी अब विशेष जांच एजेंसी को सौंप दी गई है।
Abhishek Banerjee: उच्च न्यायालय ने याचिका की थी खारिज
अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कराने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, 21 मई को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कथित भड़काऊ बयान को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की थी। अदालत ने सवाल उठाया था कि एक प्रमुख राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता और तीन बार के सांसद द्वारा सार्वजनिक मंच से इस प्रकार का बयान देना कितना उचित है, विशेषकर ऐसे राज्य में जहां चुनाव के बाद हिंसा की घटनाओं का इतिहास रहा है।
अंतरिम राहत के साथ लगीं सख्त शर्तें
हालांकि उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को 31 जुलाई तक गिरफ्तारी या किसी अन्य दमनात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान की है। इसके साथ ही अदालत ने कुछ शर्तें भी निर्धारित की हैं। इनमें अदालत की पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करने की शर्त प्रमुख है।
गौरतलब है कि आपराधिक जांच विभाग पहले से ही पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के लिए आरक्षित कुछ पदों पर नियुक्तियों से जुड़े कथित हस्ताक्षर फर्जीवाड़ा मामले की जांच कर रहा है। इसी मामले में विभाग द्वारा अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए तीन बार समन भी जारी किया जा चुका है। अब इस नए मामले की जांच भी उसी एजेंसी के पास जाने से राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें इस प्रकरण पर टिक गई हैं।
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