Mahakal Temple: उज्जैन स्थित बाबा महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को अब लाइट एंड साउंड शो देखने के लिए हर व्यक्ति को 100 रुपए का भुगतान देना होगा। मंदिर प्रबंध समिति ने यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है, वैसे करीब सात महीने तक यह शो श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह निशुल्क था।
Mahakal Temple:18 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुआ है शो-
महाकाल मंदिर परिसर में संचालित इस शो का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 अक्टूबर 2025 को दीपावली के अवसर पर किया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने करीब 18.07 करोड़ रुपए की लागत से इसे तैयार किया है।
Mahakal Temple:25 मिनट में दिखती है महाकाल और उज्जैन की गौरवगाथा-
करीब 25 मिनट के इस शो में वॉटर स्क्रीन, फाउंटेन, लेजर लाइट और अत्याधुनिक साउंड इफेक्ट्स के जरिए भगवान महाकाल, मां क्षिप्रा और प्राचीन अवंतिका नगरी उज्जैन के इतिहास और धार्मिक महत्व को दर्शाया जाता है।
Mahakal Temple:रखरखाव खर्च के कारण लगाया गया शुल्क-
मंदिर प्रशासन के अनुसार शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने लगभग 1.5 लाख रुपए खर्च होते हैं। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि इसी खर्च को पूरा करने और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया है।
Mahakal Temple:मंदिर समिति को हर साल 1.8 करोड़ रुपए आय होने का अनुमान-
मंदिर प्रशासन के मुताबिक प्रतिदिन करीब 500 श्रद्धालु यह शो देखने पहुंचते हैं। 100 रुपए शुल्क के हिसाब से प्रतिदिन लगभग 50 हजार रुपए, महीने में करीब 15 लाख रुपए और सालाना लगभग 1.8 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है।
संध्या और शयन आरती के लिए भी देना पड़ता है शुल्क-
महाकाल मंदिर में इससे पहले भी कई सेवाओं के लिए शुल्क लागू किया जा चुका है। 19 फरवरी 2026 से संध्या आरती और शयन आरती में शामिल होने के लिए 250 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जा रहा है। वहीं शीघ्र दर्शन और वीआईपी दर्शन के लिए पहले से शुल्क व्यवस्था लागू है।
आरती, शीघ्र दर्शन और शो मिलाकर खर्च पहुंच सकता है ₹1050-
यदि कोई श्रद्धालु संध्या आरती, शयन आरती, शीघ्र दर्शन और लाइट एंड साउंड शो का लाभ लेता है, तो उसे कुल मिलाकर लगभग 1050 रुपए तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
श्रद्धालुओं ने जताई नाराजगी-
कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक परिसर में आयोजित होने वाले लाइट एंड साउंड शो को पहले की तरह निशुल्क रखा जाना चाहिए, उनका मानना है कि लगातार बढ़ रहे शुल्कों से आम भक्तों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, जबकि मंदिर प्रशासन इसे व्यवस्थाओं के संचालन और रखरखाव के लिए जरूरी बता रहा है।
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