Ayodhya SIT: अयोध्या में राम मंदिर के लिए प्राप्त दान और जमीन खरीद से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने जांच तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार, SIT ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और जांच से जुड़े कुछ लोगों को अगली सूचना तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं।
फंड गबन से आगे बढ़ी जांच, जमीन खरीद भी दायरे में
सूत्रों के मुताबिक, जांच केवल कथित दान गबन तक सीमित नहीं है। SIT मंदिर ट्रस्ट द्वारा विभिन्न चरणों में की गई जमीन खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद प्रक्रिया की भी पड़ताल कर रही है। आरोप हैं कि कुछ जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गई थीं। इस मुद्दे को पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों ने उठाया था।
Ayodhya SIT: चढ़ावे के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों की जांच
प्रारंभिक जांच में सोना, चांदी, हीरे और अन्य बहुमूल्य आभूषणों के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठे हैं। सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और रिकॉर्ड में कई बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं मिल सकी है। इसी आधार पर आगे की जांच को विस्तार दिया गया है।
Ayodhya SIT: CCTV फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड बने जांच का अहम हिस्सा
SIT डिजिटल साक्ष्यों की भी गहन जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर की CCTV रिकॉर्डिंग सीमित अवधि तक सुरक्षित रहती है, जिससे पुराने फुटेज प्राप्त करने में कठिनाई आ रही है। जांच एजेंसियां कथित रूप से डिलीट या परिवर्तित किए गए डेटा की भी पड़ताल कर रही हैं।
कुछ पदाधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। SIT यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किसी प्रकार की लापरवाही हुई या फिर कोई सुनियोजित साजिश थी। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपा जा सकता है।
13 जून को गठित की गई थी SIT
राम मंदिर में प्राप्त दान और वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। टीम में प्रशासन, पुलिस और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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