UP POLTICS: उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले कराए जाने की अटकलों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में फरवरी-मार्च 2027 की बजाय नवंबर-दिसंबर 2026 में चुनाव कराने की संभावना पर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इस संभावित बदलाव के पीछे राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा चरण एक बड़ी वजह माना जा रहा है। फरवरी 2027 में प्रस्तावित जनगणना के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती होगी। ऐसे में चुनाव और जनगणना की प्रक्रियाओं के टकराव से बचने के लिए पहले चुनाव कराने का विकल्प देखा जा रहा है।
भाजपा ने तेज की संगठनात्मक तैयारियां
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने संबंधित राज्यों की संगठनात्मक इकाइयों को चुनावी तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए हैं। बूथ स्तर की रणनीति, संगठन विस्तार और लंबित नियुक्तियों को जल्द पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में पार्टी संगठन संभावित समयपूर्व चुनाव को देखते हुए सक्रिय मोड में आ चुका है। राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क अभियानों में भी तेजी देखी जा रही है।
UP POLTICS: विपक्ष भी चुनावी मोड में
संभावित जल्द चुनाव की चर्चा के बीच विपक्षी दल भी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बीच हालिया राजनीतिक संवाद को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी पंजाब में अपने संगठन को चुनावी तैयारी की स्थिति में रहने के निर्देश दिए हैं।
चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं
हालांकि अभी तक चुनाव कार्यक्रम को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission of India) की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। आयोग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि नवंबर-दिसंबर 2026 में चुनाव कराए जाते हैं तो मतदाता सूची और प्रशासनिक तैयारियां समय पर पूरी की जा सकती हैं।
UP POLTICS: यूपी में बढ़ सकती है राजनीतिक सरगर्मी
यदि विधानसभा चुनाव तय समय से पहले कराए जाते हैं तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी तापमान कई महीने पहले ही चरम पर पहुंच सकता है। सभी प्रमुख दल संगठन मजबूत करने, उम्मीदवारों की तलाश और चुनावी समीकरण साधने में जुट गए हैं। फिलहाल समयपूर्व चुनाव को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक दलों की बढ़ती सक्रियता ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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