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Explainer: Modern Love या Murder? आखिर क्यों शादी से इनकार नहीं कर पा रहे Gen Z?

Explainer: Modern Love या Murder? आखिर क्यों शादी से इनकार नहीं कर पा रहे Gen Z?

Explainer: पुणे के लोहागढ़ किले की 400 फीट गहरी खाई में 26 वर्षीय केतन अग्रवाल का शव मिलने के बाद शुरू हुई जांच ने एक ऐसी साजिश का खुलासा किया, जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया। पुलिस के अनुसार, केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने कई महीनों तक योजना बनाकर हत्या को अंजाम दिया। जांच में सामने आया कि दोनों ने जनवरी से जून 2026 के बीच 2,004 बार फोन पर बात की और करीब 238 घंटे बातचीत की। पुलिस का दावा है कि तीन असफल कोशिशों के बाद आखिरकार केतन को खाई में धक्का देकर मार दिया गया।इस मामले ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया कि जब सिया शादी नहीं करना चाहती थी, तो उसने साफ इनकार क्यों नहीं किया? केतन के परिवार का कहना है कि यदि वह शादी से मना करती तो रिश्ता वहीं खत्म हो जाता, लेकिन उसने हत्या का रास्ता चुना।

क्या यह सिर्फ एक मामला है या बदलता सामाजिक पैटर्न?

पुणे की यह घटना अकेली नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें प्रेम संबंध, शादी का दबाव या रिश्तों में तनाव हत्या की वजह बने। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2024 में देशभर में दर्ज 27,049 हत्याओं में से 2,802 मामले प्रेम संबंधों या रिश्तों के विवाद से जुड़े थे। यानी हर 10 में से लगभग एक हत्या रिश्तों के तनाव की वजह से हुई।दिलचस्प बात यह है कि कुल हत्याओं की संख्या में गिरावट आई है, लेकिन रिश्तों से जुड़ी हत्याओं का अनुपात लगातार बढ़ा है। वर्ष 2010 से 2014 के दौरान यह हिस्सा करीब 7 से 8 प्रतिशत था, जो 2016 से 2024 के बीच बढ़कर 10 से 11 प्रतिशत तक पहुंच गया।

Explainer: रिसर्च क्या कहती हैं?

ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी की एक रिसर्च में 149 हत्याओं का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि करीब 40 प्रतिशत हत्याएं जलन या ईर्ष्या के कारण हुईं, जबकि 23 प्रतिशत मामलों के पीछे संपत्ति या आर्थिक लाभ की वजह थी। कई मामलों में पहले घरेलू हिंसा का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।वहीं तुर्किये की अंकारा यूनिवर्सिटी की स्टडी में 123 कैदियों पर किए गए अध्ययन में सामने आया कि महिलाओं द्वारा की गई करीब 24 प्रतिशत हत्याएं पहले से योजना बनाकर की गई थीं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा केवल 7 प्रतिशत था। हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि कई महिलाओं के मामलों में लंबे समय तक हिंसा, उत्पीड़न और सामाजिक दबाव अहम कारण रहे।अमेरिकी मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर टॉड शेकलफोर्ड का कहना है कि पश्चिमी देशों में पति-पत्नी के बीच होने वाली हत्याओं का अनुपात लगभग बराबर है, जबकि एशिया, यूरोप और अफ्रीका के अधिकांश देशों में ऐसे मामलों में पुरुषों की संख्या अधिक रहती है। उनके अनुसार महिलाओं द्वारा की गई कई हत्याएं आत्मरक्षा या लंबे समय तक हिंसा झेलने के बाद होती हैं, हालांकि हर मामला अलग होता है और उसके अपने तथ्य होते हैं।

Explainer:’ना’ कहना इतना मुश्किल क्यों हो जाता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय समाज में शादी अब भी केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का फैसला मानी जाती है। ऐसे में कई युवक-युवतियां अपनी वास्तविक इच्छा खुलकर नहीं बता पाते। परिवार की इज्जत, समाज का डर, माता-पिता की उम्मीदें और रिश्तों का दबाव उन्हें मानसिक रूप से उलझा देता है।मनोचिकित्सकों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक दोहरी जिंदगी जीता है, तो वह सच और झूठ के बीच संतुलन खोने लगता है। कुछ मामलों में यही मानसिक दबाव गलत फैसलों की ओर धकेल देता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि सामाजिक दबाव किसी भी स्थिति में हत्या जैसे अपराध का औचित्य साबित नहीं करता।विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिकता ने अपराध नहीं बढ़ाए, बल्कि परिस्थितियां और अपराध करने के तरीके बदल दिए हैं। पहले कई लोगों के पास अपनी पसंद से रिश्ता चुनने या मना करने की आजादी नहीं थी। अब विकल्प बढ़े हैं, लेकिन पारिवारिक और सामाजिक दबाव कई जगह पहले जैसा ही बना हुआ है। यही टकराव कई बार गंभीर विवादों का रूप ले लेता है।

Explainer:समाज के लिए क्या है सबसे बड़ा सबक?

पुणे हत्याकांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि रिश्तों, संवाद और सामाजिक दबाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि परिवारों में बच्चों को अपनी बात खुलकर कहने का माहौल मिलना चाहिए, ताकि वे किसी रिश्ते को लेकर असहमति या इनकार बिना डर के व्यक्त कर सकें।हालांकि यह भी याद रखना जरूरी है कि हर हत्या की अपनी अलग परिस्थितियां होती हैं। किसी एक घटना के आधार पर पूरे समाज, किसी लिंग या किसी वर्ग के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। अपराध का फैसला अदालत करती है और जांच पूरी होने के बाद ही किसी की कानूनी जिम्मेदारी तय होती है। ऐसे मामलों से सबसे बड़ा संदेश यही निकलता है कि रिश्तों में संवाद, सहमति और खुलापन किसी भी त्रासदी को रोकने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।

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