Europe Heatwave: यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां रिकॉर्ड तोड़ तापमान ने सामान्य जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। कई देशों में तापमान चालीस डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में पचास डिग्री सेल्सियस तक तापमान दर्ज किया गया। सबसे अधिक असर फ्रांस में देखने को मिला है, जहां पिछले दस दिनों के दौरान गर्मी से जुड़ी एक हजार से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अल नीनो प्रभाव के कारण इस बार की गर्मी असाधारण रूप से खतरनाक साबित हो रही है।
फ्रांस में सबसे अधिक तबाही
फ्रांस के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार चौबीस जून से शुरू हुई भीषण गर्मी के दौरान सामान्य दिनों की तुलना में लगभग एक हजार अधिक लोगों की मौत हुई है। इनमें पैंसठ वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक रही। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र राजधानी पेरिस और उसके आसपास का इलाका रहा, जहां अधिकांश मौतें घरों में हुईं। स्वास्थ्य विभाग ने अकेले रहने वाले बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के लोगों की विशेष देखभाल करने की अपील की है।
Europe Heatwave: अस्पतालों और सेवाओं पर बढ़ा दबाव
भीषण गर्मी के कारण फ्रांस की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव देखा गया। पेरिस के सरकारी अस्पतालों के आपातकालीन विभागों में लगातार दूसरे दिन लगभग तीन हजार मरीज पहुंचे, जो सामान्य दिनों की तुलना में करीब एक तिहाई अधिक थे। बढ़ते दबाव को देखते हुए सभी प्रमुख अस्पतालों में आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी गई। इसके साथ ही रेल सेवाओं, ऊर्जा आपूर्ति और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर भी गर्मी का असर पड़ा।

कई देशों में टूटे तापमान के रिकॉर्ड
फ्रांस के अलावा जर्मनी, डेनमार्क, चेक गणराज्य, स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड किंगडम में भी जून महीने के तापमान के नए रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। स्पेन में भी पिछले दस दिनों के दौरान गर्मी से जुड़ी तीन सौ सत्ताईस मौतों की पुष्टि हुई है। जर्मनी में अत्यधिक तापमान के कारण सड़कों को नुकसान पहुंचा, जबकि स्विट्जरलैंड में नदी का तापमान बढ़ने से परमाणु ऊर्जा संयंत्र के कुछ रिएक्टर अस्थायी रूप से बंद करने पड़े।
Europe Heatwave: जलवायु परिवर्तन और अल नीनो बना बड़ा कारण
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह हीटवेव जलवायु परिवर्तन और प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो प्रभाव का संयुक्त परिणाम है। विशेषज्ञों के अनुसार मानव गतिविधियों से बढ़ रहे वैश्विक तापमान ने इस तरह की चरम गर्मी की संभावना कई गुना बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी भी पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि आने वाले महीनों में दुनिया के कई हिस्सों में और अधिक भीषण गर्मी पड़ सकती है।

वर्ष 2003 से भी अधिक खतरनाक हालात
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कई क्षेत्रों में तापमान वर्ष दो हजार तीन की ऐतिहासिक हीटवेव से भी अधिक दर्ज किया गया है। वर्ष दो हजार तीन में फ्रांस में लगभग पंद्रह हजार लोगों की मौत हुई थी। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस बार बेहतर चिकित्सा व्यवस्था और समय पर की गई तैयारियों के कारण मृत्यु दर को पहले जैसी भयावह स्थिति तक पहुंचने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। फिर भी मौजूदा हालात पूरे यूरोप के लिए गंभीर चेतावनी माने जा रहे हैं।








