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सेना के ऑफिसर मेस में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, परिवार ने उठाए गंभीर सवाल

MP NEWS: जम्मू-कश्मीर आरआरसी के ऑफिसर गेस्ट हाउस में संदिग्ध परिस्थितियों में घायल होने के बाद मिलिट्री अस्पताल में नवविवाहिता की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। मृतका के पिता ने पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

शादी के 99 दिन बाद हुई मौत

तमिलनाडु निवासी याचिकाकर्ता पी. दक्षिणामूर्ति ने याचिका में बताया कि उनकी बेटी अधिवक्ता कविता का विवाह 2 मार्च 2025 को जम्मू-कश्मीर आरआरसी में डॉक्टर के पद पर पदस्थ मेजर ओम नागार्जुन से हुआ था। उनका आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद दामाद और उसके परिवार ने अस्पताल खोलने के लिए दो करोड़ रुपये की मांग शुरू कर दी थी। आर्थिक स्थिति का हवाला देकर रकम देने से इनकार करने के बाद बेटी के साथ प्रताड़ना बढ़ गई।

MP NEWS: बाथरूम में गिरने की कहानी पर सवाल

याचिका के अनुसार, 9 जुलाई 2025 को दामाद ने सूचना दी कि कविता बाथरूम में गिर गई है और उसे मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट का उल्लेख है, लेकिन मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है, जिस पर परिवार ने संदेह जताया है।

तीन घंटे की देरी पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि ऑफिसर मेस से मिलिट्री अस्पताल की दूरी महज पांच मिनट की है, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार कविता को घटना के करीब तीन घंटे बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनका आरोप है कि इसी दौरान ऐसी परिस्थितियां बनीं, जिनके कारण उसकी मौत हुई। अस्पताल के रिकॉर्ड और पति के बयान में भी समय को लेकर विरोधाभास होने का दावा किया गया है।

MP NEWS: पुलिस जांच पर भी सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि गोरा बाजार पुलिस ने केवल मर्ग कायम किया, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की। परिवार का कहना है कि नवविवाहिता की संदिग्ध मौत की जांच नियमानुसार राजपत्रित अधिकारी से कराई जानी चाहिए थी। पुलिस अधीक्षक से शिकायत के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं हुई।

सीबीआई जांच की मांग

याचिकाकर्ता ने इसे दहेज हत्या का मामला बताते हुए आरोप लगाया है कि साक्ष्यों को छिपाने का प्रयास किया गया। परिवार का कहना है कि पुलिस और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इसलिए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच केवल सीबीआई से ही कराई जा सकती है। अब इस मामले में हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई का इंतजार है।

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