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Alzheimer’s Disease: 1906 की वह खोज जिसने बदल दी मेडिकल दुनिया, ऐसे सामने आई अल्जाइमर बीमारी

Alzheimer’s Disease : बढ़ती उम्र के साथ भूलने की समस्या को अक्सर सामान्य माना जाता है, लेकिन दुनिया को पहली बार यह बताने का श्रेय जर्मनी के मनोचिकित्सक और न्यूरोपैथोलॉजिस्ट एलोइस अल्जाइमर को जाता है कि यह केवल बुढ़ापे का असर नहीं, बल्कि मस्तिष्क की एक गंभीर बीमारी है. आज इसी खोज के कारण पूरी दुनिया इस बीमारी को अल्जाइमर रोग के नाम से जानती है. 14 जून 1864 को जर्मनी के मार्कब्रेट में जन्मे एलोइस अल्जाइमर बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे. उन्हें जीव विज्ञान और इंसानी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझने में विशेष रुचि थी. चिकित्सा की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मानसिक रोगों और मस्तिष्क की संरचना पर शोध शुरू किया.

साल 1901 में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट के एक अस्पताल में 51 वर्षीय महिला ऑगस्टे डेटर को भर्ती कराया गया. वह बार-बार बातें भूल जाती थीं, अपने परिजनों को पहचान नहीं पाती थीं और लोगों पर बेवजह शक करती थीं.

Alzheimer’s Disease

डॉ. अल्जाइमर ने उनके लक्षणों का लंबे समय तक अध्ययन किया. एक बार जब उन्होंने मरीज से उसका और उसके पति का नाम पूछा, तो दोनों सवालों के जवाब में उसने केवल “ऑगस्टे” कहा. बाद में यह मामला मेडिकल इतिहास में ‘केस ऑगस्टे डी’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ. 1906 में ऑगस्टे डेटर की मृत्यु के बाद डॉ. अल्जाइमर ने उनके मस्तिष्क का सूक्ष्म परीक्षण किया. जांच में पता चला कि मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएं असामान्य रूप से सिकुड़ चुकी थीं और उनमें प्रोटीन के असामान्य जमाव मौजूद थे. यह खोज उस समय पूरी तरह नई थी.

बदल दी मेडिकल दुनिया

इस अध्ययन के आधार पर डॉ. अल्जाइमर ने पहली बार वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ बताया कि याददाश्त का कमजोर होना केवल उम्र बढ़ने या मानसिक अस्थिरता का परिणाम नहीं है, बल्कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के धीरे-धीरे नष्ट होने से होने वाली एक अलग बीमारी है. उन्होंने मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों पर भी महत्वपूर्ण शोध किया. नवंबर 1906 में उन्होंने अपनी खोज वैज्ञानिकों की एक बैठक में प्रस्तुत की, लेकिन उस समय उनके शोध को खास महत्व नहीं मिला. इसके बावजूद उन्होंने अपना काम जारी रखा और वैज्ञानिक पत्रिकाओं में शोध प्रकाशित करते रहे.

19 दिसंबर 1915 को उनके निधन के बाद दुनिया ने उनके शोध की अहमियत को समझा. बाद में इसी बीमारी का नाम उनके सम्मान में अल्जाइमर रोग रखा गया. आज यह दुनिया में डिमेंशिया का सबसे सामान्य कारण माना जाता है और इस पर लगातार शोध जारी है.

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Sanjucta