Mohan Bhagwat: Mohan Bhagwat ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, बढ़ते आत्महत्या के मामलों और बदलते पारिवारिक माहौल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के समय में छोटी-छोटी असफलताओं को भी कई बच्चे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
12वीं में फेल होने पर आत्महत्या कर रहे बच्चे
मोहन भागवत ने कहा कि पहले लोग धार्मिक ग्रंथों और प्रेरणादायक कथाओं से मानसिक मजबूती हासिल करते थे, लेकिन आज हालात बदल गए हैं। उन्होंने कहा, “12वीं में फेल होने पर बच्चे आत्महत्या कर लेते हैं। घर में डांट पड़ जाए तो घर छोड़ देते हैं या आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। आखिर हमारा मन इतना कमजोर कैसे हो गया?”
Mohan Bhagwat: दादी की कहानियों की जगह मोबाइल ने ले ली
उन्होंने कहा कि पहले दादी-नानी बच्चों को कहानियां सुनाती थीं, जिनसे संस्कार और मानसिक मजबूती मिलती थी। लेकिन अब संयुक्त परिवार कम हो गए हैं और बच्चों का अधिक समय मोबाइल व टीवी के साथ बीतता है। उन्होंने कहा कि कई माता-पिता बच्चों को शांत कराने के लिए बचपन से ही मोबाइल थमा देते हैं, जिसका असर उनके मानसिक विकास पर पड़ता है।
Mohan Bhagwat: स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन भी जरूरी
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए केवल शरीर का स्वस्थ होना काफी नहीं है, बल्कि मन का स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है। उनके अनुसार, सकारात्मक सोच व्यक्ति को मजबूत बनाती है, जबकि नकारात्मक विचार मन को कमजोर कर देते हैं।
भारतीय परंपरा में मानसिक स्वास्थ्य का समाधान
मोहन भागवत ने कहा कि आधुनिक मनोविज्ञान का विकास पश्चिम में हुआ है और उससे काफी सीख मिली है, लेकिन भारत की परंपरा में भी मानसिक स्वास्थ्य और मन के संतुलन को लेकर समृद्ध ज्ञान मौजूद है। उनका मानना है कि भारतीय परंपराओं और आधुनिक विज्ञान, दोनों के संतुलित उपयोग से समाज को बेहतर दिशा मिल सकती है।
परिवार की भूमिका सबसे अहम
Mohan Bhagwat: अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि आज लोग घर की कई जिम्मेदारियां संस्थाओं, अस्पतालों और सरकार पर छोड़ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कार, आत्मनिर्भरता और मजबूत मानसिकता विकसित करने की शुरुआत परिवार से ही होनी चाहिए।
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