Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT ने बड़ा खुलासा किया है। ACS संजय प्रसाद को 23 जून को सौंपी गई शुरुआती रिपोर्ट में SIT ने अविनाश शुक्ला को इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है। SIT के मुताबिक, बीते करीब 40 दिनों में मंदिर के दान काउंटिंग रूम में लगभग 70 बार चोरी की गई थी।
अविनाश के बयान से खुला पूरा नेटवर्क
जांच अधिकारियों का कहना है कि अविनाश से हुई पूछताछ के बाद ही बाकी पांच आरोपियों का पता चला। SIT की रिपोर्ट के अनुसार, CCTV फुटेज में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे अविनाश की मदद करते दिखे। ये तीनों उसे पैसा छिपाने और काउंटिंग रूम से बाहर निकालने में सहयोग कर रहे थे।
मनीष कुमार यादव गिनती वाले कमरे के अंदर अविनाश के साथ मौजूद था। वहीं, ट्रस्ट की तरफ से दिए गए फुटेज में रामाशंकर मिश्रा को कैश के बंडल संभालते और एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करते हुए देखा गया। SIT ने इन सभी सबूतों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि छहों लोगों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता बनती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दान गिनती की व्यवस्था में कई खामियां थीं, जिनका आरोपियों ने फायदा उठाया।
Ram Mandir Donation Theft: अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी
अयोध्या पुलिस ने जब अविनाश के घर और अन्य ठिकानों पर दबिश दी, तो इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी हुई। उसके पास से 20.39 लाख रुपये नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के गहने, अन्य कीमती सामान और एक SUV बरामद की गई। SIT ने इसे दान के पैसे के हेरफेर का सबसे मजबूत सबूत माना है।
वित्तीय जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। दान गिनने वाले कर्मचारियों की मासिक सैलरी लगभग 20 हजार रुपये थी और कटौती के बाद हाथ में करीब 15 हजार आते थे। लेकिन अविनाश के बैंक खातों में लेनदेन उसकी कमाई से कई गुना ज्यादा था। इसी आधार पर SIT ने उसे नंबर वन आरोपी घोषित किया है।
अब SIT की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंदिर ट्रस्ट ने भी आश्वासन दिया है कि दान की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
Written by- Mansi Sharma
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