Kedarnath Temple: उत्तराखंड सरकार ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में मंदिर कोष के इस्तेमाल में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया कई प्रक्रियात्मक खामियां और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिलने के बाद सरकार ने समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि मंदिर कोष के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जांच रिपोर्ट में सामने आईं कई अनियमितताएं
जांच में सामने आया है कि केदारनाथ में वीआईपी मेहमानों के ठहरने, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए मंदिर कोष से अग्रिम राशि जारी की गई, जबकि इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। जांच टीम के अनुसार, कुछ अधिकारियों ने निर्धारित नियमों का पालन किए बिना खर्चों को स्वीकृति दी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि होटल बुकिंग, भोजन और अन्य सुविधाओं पर किया गया खर्च मंदिर की दान राशि से वहन किया गया। इन खर्चों के लिए आवश्यक लिखित स्वीकृति और वित्तीय प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने के कारण पूरे मामले पर सवाल खड़े हुए हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्यभर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
Kedarnath Temple: सरकार ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। सूत्रों के अनुसार, दोषियों के खिलाफ निलंबन, पद से हटाने या आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई केवल प्रारंभिक चरण है और आवश्यकता पड़ने पर मामले की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी, ताकि किसी अन्य अनियमितता का भी पता लगाया जा सके।
मंदिर समिति की भूमिका और पारदर्शिता पर उठे सवाल
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति चारधाम यात्रा के दौरान मंदिरों के संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, धार्मिक व्यवस्थाओं और मंदिर परिसरों के रखरखाव की जिम्मेदारी निभाती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इन धामों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान भी मंदिर समिति को प्राप्त होता है। ऐसे में मंदिर कोष के उपयोग में कथित अनियमितताओं की खबर सामने आने के बाद कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। उन्होंने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया दान केवल धार्मिक और जनहित के कार्यों में ही खर्च हो। सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि भविष्य में मंदिर समिति के वित्तीय लेन-देन और खर्चों की निगरानी और अधिक सख्ती से की जाएगी।
ये भी पढ़ें…MP News: शराब के नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक, गेट पर बेसुध मिला; वीडियो वायरल








