Asim Munir: पाकिस्तान में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर तीखा हमला बोला है। कराची के ल्यारी में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सेना प्रमुख को राजनीति करने का इतना ही शौक है तो उन्हें वर्दी उतारकर चुनाव मैदान में उतरना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि तब जनता उनकी वास्तविक लोकप्रियता का फैसला कर देगी।
‘तनख्वाह सेना लेती है, लड़ाई जनता क्यों लड़े?’
मौलाना फजलुर रहमान ने सेना की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें नागरिकों से आतंकवाद के खिलाफ हथियार उठाकर सशस्त्र समूह बनाने का आह्वान किया गया था। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा करना सेना और सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारी है, आम नागरिकों की नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सेना जनता के टैक्स के पैसों से वेतन लेती है तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने की जिम्मेदारी भी उसी की होनी चाहिए।
Asim Munir: आम लोगों को हथियार देने पर जताई चिंता
सभा में मौलाना ने कहा कि नागरिकों को उग्रवादियों के खिलाफ लड़ाई में झोंकना देश को लंबे समय तक हिंसा, दुश्मनी और अस्थिरता की ओर धकेल सकता है। उनके अनुसार, निजी या कबीलाई सशस्त्र समूहों का गठन भविष्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
Asim Munir: राजनीति में सेना की भूमिका पर उठाए सवाल
मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की राजनीति में सेना के कथित हस्तक्षेप पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि सेना नेतृत्व राजनीतिक प्रभाव बनाए रखना चाहता है, तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता किसे मिले और किससे छीनी जाए, यह तय करना सेना का अधिकार नहीं होना चाहिए।
कौन हैं मौलाना फजलुर रहमान?
मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान की जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के प्रमुख हैं। उनकी पार्टी के नेशनल असेंबली में 10 सांसद हैं और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) समर्थित निर्दलीय सांसदों के बाद उनकी पार्टी प्रमुख विपक्षी दलों में गिनी जाती है। ऐसे में सेना प्रमुख के खिलाफ उनका यह बयान पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस और विवाद का कारण बन गया है।
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