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भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक! डार्क वेब पर अपलोड हुए हजारों गोपनीय दस्तावेज

 Nuclear plant data leak:

 Nuclear plant data leak: भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े हजारों संवेदनशील दस्तावेज लीक होने का मामला सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, हैकर्स ग्रुप ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने डार्क वेब पर इन दस्तावेजों को अपलोड करने का दावा किया है। लीक फाइलों में प्लांट के ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की सूची, कंट्रोल रूम से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं।

मई में हुआ साइबर अटैक, जून में डेटा लीक का दावा

जानकारी के अनुसार, कुडनकुलम परियोजना की यूनिट-3 और यूनिट-4 पर काम कर रही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर का कुछ डेटा थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा के सर्वर पर मौजूद था। 29 मई 2026 को योट्टा ने संदिग्ध साइबर गतिविधि का पता लगाया और दावा किया कि हमले को रोक दिया गया। हालांकि जून के अंत में हैकर समूह ने डेटा चोरी कर डार्क वेब पर अपलोड करने का दावा किया।

 Nuclear plant data leak: 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज लीक होने का दावा

हैकर्स के मुताबिक, करीब 8.58 लाख फाइलों में से लगभग 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं। इनमें कथित तौर पर प्लांट के ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की जानकारी, निरीक्षण रिपोर्ट, बैठकों के रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी फाइलें शामिल हैं।

 Nuclear plant data leak: CERT-In और NPCIL ने शुरू की जांच

रिलायंस ग्रुप ने स्वीकार किया है कि थर्ड-पार्टी सर्वर हैक हुआ था और इसकी जानकारी संबंधित सरकारी एजेंसियों को दे दी गई है। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) मामले की जांच कर रही हैं।

विशेषज्ञों ने जताई सुरक्षा की चिंता

परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लीक हुए दस्तावेज वास्तविक हैं, तो इनके जरिए कोई भी हमलावर प्लांट की सप्लाई चेन, सुरक्षा व्यवस्था और सहायक प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझ सकता है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।

2019 में भी हुआ था साइबर हमला

यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम प्लांट साइबर हमले की चपेट में आया हो। वर्ष 2019 में भी उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह के मैलवेयर की पुष्टि हुई थी। हालांकि उस समय NPCIL ने स्पष्ट किया था कि प्लांट की परिचालन प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित रही थी।

क्या है डार्क वेब?

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जहां सामान्य ब्राउज़र से पहुंच संभव नहीं होती। इसे एक्सेस करने के लिए विशेष ब्राउज़र की जरूरत होती है। साइबर अपराधी अक्सर चोरी किए गए डेटा को यहीं बेचते या सार्वजनिक करते हैं।

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