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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन बनाने वाली फैक्ट्री का 71 साल का सफर, रेल निर्माण में रचा इतिहास

India Hydrogen Train: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन यहाँ बनी

India Hydrogen Train: भारत ने हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच पहली “हाइड्रोजन ट्रेन” ‘नमो ग्रीन रेल’ की शुरुआत कर हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। इस ट्रेन का निर्माण चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है। वर्ष 1955 से संचालित यह फैक्ट्री पिछले 71 वर्षों से भारतीय रेलवे के लिए आधुनिक ट्रेन, कोच और रेल तकनीक के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हाइड्रोजन ट्रेन के निर्माण के बाद एक बार फिर यह फैक्ट्री चर्चा के केंद्र में है।

1955 में हुई शुरुआत, नेहरू ने किया था उद्घाटन

इंटीग्रल कोच फैक्ट्री तमिलनाडु के चेन्नई के पेरम्बूर क्षेत्र में स्थित है। आजादी के बाद भारत रेल डिब्बों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर था। इसी चुनौती को देखते हुए देश में कोच निर्माण इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया गया। 2 अक्टूबर 1955 को यहां से पहला रेल कोच तैयार हुआ और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसका उद्घाटन किया। तब से यह फैक्ट्री लगातार भारतीय रेलवे की जरूरतों को पूरा कर रही है।

India Hydrogen Train: सामान्य कोच से लेकर वंदे भारत और फिर हाइड्रोजन ट्रेन तक का निर्माण ICF में 

सामान्य रेल कोच से लेकर वंदे भारत और भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन तक का निर्माण चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में हुआ है। वर्ष 1955 से भारतीय रेलवे की इस प्रमुख उत्पादन इकाई ने यात्री कोच, एलएचबी कोच, ईएमयू, मेमू और अत्याधुनिक ट्रेन सेट तैयार कर रेलवे के आधुनिकीकरण में अहम योगदान दिया है। वंदे भारत जैसी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन और अब देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का निर्माण भी इसी फैक्ट्री में हुआ है। आईसीएफ आज भारतीय रेलवे की तकनीकी प्रगति, आत्मनिर्भर भारत और हरित परिवहन की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण निर्माण इकाइयों में गिनी जाती है।

India Hydrogen Train:

अब तैयार हुई देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का डिजाइन रेलवे के रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ने तैयार किया, जबकि इसका निर्माण आईसीएफ में हुआ। इस उपलब्धि के साथ भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है।

India Hydrogen Train: हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम

हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल तकनीक पर आधारित है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन लगभग नहीं होता और केवल जलवाष्प तथा गर्मी निकलती है। ट्रेन में फ्यूल सेल, बैटरी, हाइड्रोजन स्टोरेज और अत्याधुनिक सुरक्षा सेंसर लगाए गए हैं। यह परियोजना भारतीय रेलवे के हरित और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

 

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