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सोनम वांगचुक की नई शर्तों पर उठे सवाल! धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग क्यों गायब? CJP प्रवक्ता पहुंचे जेपी नड्डा से मिलने

CJP Parliament March: 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की ओर से अनशन समाप्त करने के लिए रखी गई नई शर्तों ने आंदोलन की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से शुरू हुए आंदोलन में अब यह मांग उनकी ताजा शर्तों में शामिल नहीं है, जिससे आंदोलन के रुख में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।

नई शर्तों में इस्तीफे का जिक्र नहीं

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में पेपर लीक जैसी विफलताओं की जिम्मेदारी ले, या विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद संसद में शिक्षा सुधार का मुद्दा उठाने का भरोसा दें, अथवा स्वास्थ्य कारणों से सांसद अस्पताल आकर ऐसा आश्वासन दें, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उनकी तीनों शर्तों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कोई उल्लेख नहीं है।

CJP Parliament March: इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ था आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सोनम वांगचुक ने जून में आंदोलन की शुरुआत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग के साथ की थी। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और बाद में शुरू हुई भूख हड़ताल का प्रमुख मुद्दा भी यही था। अब नई शर्तों में इस मांग के गायब होने से विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच बहस छिड़ गई है।

CJP Parliament March
                                                     CJP Parliament March

 

AISA नेताओं ने भी खत्म किया अनशन

इसी बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्र नेताओं ने भी 23 दिनों से जारी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। अभिनेता शबाना आज़मी, प्रकाश राज और राज्यसभा सांसद मनोज झा की मौजूदगी में उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया गया।

CJP Parliament March: जेपी नड्डा से मिलने पहुंचे CJP प्रतिनिधि

सोमवार को CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने जानकारी दी कि सरकार की ओर से बातचीत की पहल हुई है और संगठन के प्रतिनिधि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मिलने जा रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित समझौते की अटकलें भी तेज हो गई हैं।

रुख बदलने पर उठे सवाल

वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों ने सोनम वांगचुक के बदले रुख पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस आंदोलन की शुरुआत शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से हुई थी, उसमें अब केवल संसद में चर्चा और राजनीतिक आश्वासन को पर्याप्त मानना आंदोलन की रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि स्वास्थ्य स्थिति और सरकार के साथ संभावित बातचीत के कारण यह बदलाव आया हो सकता है।

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