New Delhi: नीट पेपर लीक मामले और सीजेपी के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से पूछा कि दोषियों को सजा देना जरूरी है, लेकिन उन छात्रों के नुकसान की भरपाई कैसे होगी, जिनका भविष्य इस पूरे विवाद से प्रभावित हुआ है।
उन छात्रों का क्या जिनकी मौत हो गई?
एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “उन छात्रों का क्या जिनकी मौत हो गई? उन छात्रों का क्या जिन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ी लेकिन वे वैसी रैंक हासिल नहीं कर पाए? उनका समय तो बर्बाद हो ही चुका है। आप उनके लिए क्या करेंगे?” उन्होंने कहा कि केवल दोषियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है बल्कि प्रभावित छात्रों के हितों की भी चिंता करनी होगी।
New Delhi: सरकार ने सख्त रवैया अपनाया
इसी बीच सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला। ओवैसी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों से बातचीत के बजाय सरकार ने सख्त रवैया अपनाया।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर बैठे थे और सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए था।
New Delhi: विरोध की आवाज को सुना जाना चाहिए
उन्होंने पुलिस कार्रवाई को “कुप्रबंधन” बताते हुए कहा कि घटनास्थल के दृश्य देखकर कोई भी समझ सकता है कि प्रदर्शनकारियों के साथ किस तरह का व्यवहार किया गया।
ओवैसी ने बताया कि उन्होंने संसद परिसर में प्रदर्शन पर बैठे सांसद चंद्रशेखर से मुलाकात की है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध की आवाज को सुना जाना चाहिए।
New Delhi: मुद्दों पर बहस हो
झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि सभी विपक्षी दल चाहते हैं कि संसद सुचारू रूप से चले,क्योंकि सांसदों के पास अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे हैं और राष्ट्रीय महत्व के कई विषयों पर भी चर्चा जरूरी है। सर्वदलीय बैठक में भी विपक्ष ने स्पष्ट किया था कि वह उन मुद्दों पर बहस चाहता है जिन पर देश जवाब मांग रहा है।
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New Delhi: सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत नहीं करना चाहती
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी। सावंत ने आरोप लगाया कि सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत नहीं करना चाहती।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार शुरुआत में ही प्रदर्शनकारियों से बात करती और मामले की जांच का भरोसा देती तो विवाद जल्द खत्म हो सकता था। लंबे समय से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोग अचानक हिंसा क्यों करेंगे। उन्होंने आशंका जताई कि प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए कुछ लोगों की घुसपैठ हो सकती है।
New Delhi: विपक्ष की आवाज दबा रही सरकार
कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि उसे करीब 30 प्रतिशत वोट मिले हैं और वह भारी बहुमत के आधार पर विपक्ष को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को संसद में अपने मुद्दे रखने का अधिकार है लेकिन स्थगन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी जा रही है। नीट विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे विभिन्न आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारियों से पहले ही बातचीत करनी चाहिए थी।
New Delhi: प्रदर्शनकारियों से दुर्व्यवहार हुआ
समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से व्यवहार नहीं किया गया। महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार, बिना वर्दी वाले लोगों द्वारा लाठी चलाने और पुलिसकर्मियों की पहचान नहीं होने जैसे मामले गंभीर हैं।
राजीव राय ने आरोप लगाया कि सांसद होने की जानकारी देने के बाद भी उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौके पर मौजूद एंबुलेंस केवल दिखावे के लिए थी और उसमें आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।
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