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पेपर लीक पर सरकार का एक्शन शुरू, NTA में 47 अधिकारियों की नौकरी गई, अब पेपर लीक पर 10 साल तक सजा

Paper Leak: बड़ी कार्यवाही: NTA में 47 अधिकारियों की नौकरी गई make 16 ratio 9 photo for website according this headline'

Paper Leak: NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव की दिशा में कदम उठाए हैं। देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और परीक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि NTA के 47 अधिकारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।

NTA के 47 अधिकारियों पर कार्रवाई

NEET पेपर लीक विवाद के बाद NTA लगातार सवालों के घेरे में रही है। इसी के चलते परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एजेंसी के स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई है। बताया जा रहा है कि 47 अधिकारियों को हटाया गया है। सरकार अब NTA की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है, ताकि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर किसी तरह की अनियमितता की गुंजाइश कम हो।

Paper Leak: कुछ अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई संभव

जानकारी के अनुसार, हटाए गए अधिकारियों में से कुछ के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि NTA में सुधार की प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले समय में परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम बदलाव किए जा सकते हैं। वहीं, मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के बीच यह भी संकेत दिए गए हैं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे।

पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून

पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार सख्त कानून लाने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में पेपर लीक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसके बाद कैबिनेट कमेटी ने प्रस्तावित विधेयक को मंजूरी दी। अब इसे संसद में पेश किए जाने की तैयारी है।

Paper Leak: दोषियों को 10 साल तक की सजा

प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा, मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। सरकार का दावा है कि इन सख्त कदमों से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा फिर से कायम किया जा सकेगा।

 

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