Home » नई दिल्ली » E-20 के खिलाफ आंदोलन के ऐलान के बीच जानिए, अन्ना आंदोलन से कैसे दिल्ली की सत्ता तक पहुंचे अरविंद केजरीवाल

E-20 के खिलाफ आंदोलन के ऐलान के बीच जानिए, अन्ना आंदोलन से कैसे दिल्ली की सत्ता तक पहुंचे अरविंद केजरीवाल

E-20 के खिलाफ आंदोलन के ऐलान के बीच जानिए, अन्ना आंदोलन से कैसे दिल्ली की सत्ता तक पहुंचे अरविंद केजरीवाल

Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E-20 के खिलाफ अभियान छेड़ने का ऐलान किया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी इसे सीधे आम लोगों से जुड़ा मुद्दा बता रही है। दिलचस्प बात यह है कि केजरीवाल की राजनीतिक यात्रा भी एक बड़े जन आंदोलन से शुरू हुई थी। वर्ष 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और देखते ही देखते वह दिल्ली की राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो गए। अब एक बार फिर वह आंदोलन की राह पर चलते नजर आ रहे हैं।

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से मिली थी राष्ट्रीय पहचान

अरविंद केजरीवाल का नाम सबसे पहले 2011 के इंडिया अगेंस्ट करप्शन (IAC) आंदोलन के दौरान देशभर में चर्चा में आया। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के नेतृत्व में शुरू हुए इस आंदोलन का उद्देश्य जन लोकपाल कानून की मांग और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनमत तैयार करना था। उस समय केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी और कई कथित घोटालों को लेकर सरकार विपक्ष के निशाने पर थी। आंदोलन को देशभर में व्यापक समर्थन मिला और लाखों लोग इसके साथ जुड़े।

Arvind Kejriwal: आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, शाजिया इल्मी, योगेंद्र यादव और कुमार विश्वास जैसे कई चेहरे राष्ट्रीय स्तर पर उभरे। बाद में आंदोलन के राजनीतिक भविष्य को लेकर मतभेद सामने आए। अन्ना हजारे राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते थे, जबकि केजरीवाल और उनके सहयोगियों ने राजनीतिक विकल्प देने की बात कही। इसके बाद 26 नवंबर 2012 को आम आदमी पार्टी का गठन हुआ और अरविंद केजरीवाल इसके राष्ट्रीय संयोजक बने।

Arvind Kejriwal: आंदोलन से सत्ता तक का सफर

नई पार्टी ने खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक वैकल्पिक राजनीतिक ताकत के रूप में पेश किया। दिल्ली की जनता ने भी इस प्रयोग को समर्थन दिया। 2013 में पहली बार सरकार बनाने के बाद AAP ने 2015 और 2020 के विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल किया। इस तरह एक सामाजिक आंदोलन से निकले अरविंद केजरीवाल लगातार तीन बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

विवादों और चुनौतियों का भी रहा साथ

हालांकि, AAP की राजनीतिक यात्रा विवादों से भी अछूती नहीं रही। दिल्ली की कथित आबकारी नीति से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मार्च 2024 में अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और पार्टी ने आतिशी को मुख्यमंत्री बनाया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विपक्ष ने AAP और केजरीवाल पर लगातार निशाना साधा, जबकि पार्टी ने आरोपों को राजनीतिक बताया।

Arvind Kejriwal: अब E-20 के खिलाफ नए अभियान पर नजर

अब अरविंद केजरीवाल ने E-20 के खिलाफ अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। AAP इसे जनता के हितों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए लोगों के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि क्या केजरीवाल का यह नया जन अभियान भी उनकी पहले की आंदोलनकारी राजनीति की तरह व्यापक जनसमर्थन हासिल कर पाएगा। आने वाले दिनों में यह अभियान दिल्ली की राजनीति में कितना असर डालता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।

ये भी पढ़े……..E-20 के खिलाफ ‘AAP’ का अभियान, अरविंद केजरीवाल ने किया ये बड़ा ऐलान…