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E20 पेट्रोल को लेकर सरकार का बड़ा दावा, कहा- बेहतर प्रदर्शन के साथ 30% तक कम कार्बन उत्सर्जन

E20 Petrol
E20 Petrol

E20 Petrol: केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में E20 पेट्रोल को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। सरकार के मुताबिक, E20 पेट्रोल से वाहनों को बेहतर एक्सेलरेशन, स्मूद राइड क्वालिटी और E10 पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन का लाभ मिलता है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापक वैज्ञानिक अध्ययनों और वास्तविक उपयोग से मिले आंकड़ों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण इंजन में जंग, असामान्य घिसावट या वाहन की उम्र कम होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। सरकार का कहना है कि यह स्थिति उन लाखों पुराने वाहनों में भी देखने को नहीं मिली, जिन्हें मूल रूप से E20 ईंधन के लिए प्रमाणित नहीं किया गया था।

E20 ईंधन को सरकार ने बताया सुरक्षित

सरकार के अनुसार, E20 पेट्रोल को लागू करने से पहले देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल और पेट्रोलियम संस्थाओं ने व्यापक स्तर पर परीक्षण किए। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और विभिन्न वाहन निर्माताओं ने प्रयोगशाला परीक्षण के साथ-साथ फील्ड ट्रायल भी किए। इन परीक्षणों में इंजन की मजबूती, वाहन का प्रदर्शन, स्टार्ट होने की क्षमता, जंग-रोधी क्षमता, सामग्री की अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे कई पहलुओं का मूल्यांकन किया गया। सरकार का दावा है कि इन सभी अध्ययनों में E20 ईंधन को सुरक्षित पाया गया।

E20 Petrol: पुराने वाहनों पर भी नहीं दिखा बड़ा असर

सरकार ने कहा कि परीक्षणों से यह सामने आया है कि पुराने वाहनों के प्रदर्शन में E20 ईंधन के इस्तेमाल से कोई उल्लेखनीय नकारात्मक बदलाव नहीं आता। इसके अलावा इंजन या वाहन के अन्य प्रमुख पुर्जों में भी असामान्य घिसावट के प्रमाण नहीं मिले हैं। सरकार ने अपने दावे के समर्थन में बड़े स्तर पर जुटाए गए वास्तविक उपयोग के आंकड़ों का भी हवाला दिया है।

करोड़ों वाहनों की सर्विसिंग के आंकड़े

सरकार के अनुसार, एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। इनमें करीब 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे, जिन्हें मूल रूप से E20 ईंधन के अनुकूल प्रमाणित नहीं किया गया था। इसके बावजूद किसी भी वाहन में E20 पेट्रोल के कारण जंग, असामान्य घिसावट या पुर्जों की उम्र कम होने की शिकायत सामने नहीं आई। इसी तरह, एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता ने भी अपने स्तर पर ऐसे ही परिणाम दर्ज किए हैं।

E20 Petrol: लंबे समय की निगरानी में भी नहीं मिली तकनीकी समस्या

सरकार ने बताया कि एक अन्य बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी ने लंबे समय तक 1.4 करोड़ E20 ईंधन से चलने वाले वाहनों की निगरानी की। इस दौरान भी एथेनॉल के कारण इंजन में जंग या किसी अन्य गंभीर तकनीकी समस्या का कोई प्रमाण नहीं मिला। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, ARAI ने भी स्पष्ट किया है कि किसी वाहन को ग्राहकों तक पहुंचाने से पहले उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कड़े परीक्षण और सत्यापन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य वाहनों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और प्रदर्शन सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और वास्तविक उपयोग के आंकड़ों के आधार पर E20 पेट्रोल को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताओं का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।

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