Exam Reform Task Force: केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय टास्क फोर्स ने देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है।
Exam Reform Task Force: प्रश्नपत्र तैयार करने वालों की विश्वसनीयता सबसे बड़ी चुनौती-
टास्क फोर्स के सदस्य और आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी ने कहा कि किसी भी परीक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी चुनौती प्रश्नपत्र तैयार करने वालों की ईमानदारी और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार, यदि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया सुरक्षित रहेगी तो पेपर लीक की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
Exam Reform Task Force: परीक्षा प्रणाली के दो अहम स्तंभ-
कामकोटी ने बताया कि परीक्षा प्रणाली दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित होती है। पहला, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञ और दूसरा, परीक्षा केंद्रों पर तैनात निरीक्षक। उन्होंने कहा कि निगरानी के लिए कैमरों का उपयोग पहले से किया जा रहा है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रश्नपत्र तैयार करने वालों पर भरोसा बनाए रखना है।
तकनीक आधारित और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली पर जोर-
उन्होंने कहा कि बढ़ती परीक्षार्थियों की संख्या को देखते हुए तकनीक का उपयोग बेहद जरूरी हो गया है। टास्क फोर्स का उद्देश्य एक ऐसी पारदर्शी, मजबूत और तकनीक-संचालित परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जो बड़े स्तर पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सके।
2024 और 2026 के पेपर लीक में बताया अंतर-
कामकोटी के अनुसार, वर्ष 2024 में प्रश्नपत्र वितरण के दौरान लीक हुआ था, जबकि 2026 में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक लीक की शुरुआत प्रश्नपत्र तैयार करने के स्तर से हुई। उन्होंने कहा कि इस बार वितरण प्रक्रिया सुरक्षित रही, लेकिन शुरुआती चरण में ही गोपनीयता भंग हुई।
क्या AI तैयार करेगा प्रश्नपत्र-
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर कामकोटी ने कहा कि AI प्रश्न तैयार करने और अनुवाद में मदद कर सकता है, लेकिन अंतिम समीक्षा और सत्यापन का कार्य इंसानों को ही करना होगा। खासकर नीट जैसी बहुभाषी परीक्षाओं में मानव विशेषज्ञों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहेगी।
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