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अखिलेश यादव की टोपी वाली तस्वीर पर मौलाना का तंज, 2027 को लेकर साफ किया मुस्लिम समाज का रुख

अखिलेश यादव की राजनीति पर मौलाना का तंज

Uttar Pradesh News: अखिलेश यादव की टोपी वाली तस्वीर पर मौलाना ने टिप्पणी करते हुए समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समाज को बार-बार राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया, लेकिन उसके मुद्दों और हिस्सेदारी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

Uttar Pradesh News: अखिलेश यादव की तस्वीर पर कसा तंज

वीडियो में मौलाना अखिलेश यादव की टोपी पहने तस्वीर दिखाते हुए उन पर टिप्पणी करते नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि तस्वीर में अखिलेश यादव काफी अच्छे लग रहे हैं, लेकिन इसके बाद उन्होंने उनकी राजनीति और मुस्लिम सांसदों के साथ उनके संबंधों को लेकर सवाल उठाए। मौलाना का आरोप है कि अखिलेश यादव की वजह से मुस्लिम सांसदों के साथ मजबूती से खड़े होने की स्थिति नहीं बन रही है।

2022 के चुनाव को लेकर लगाए आरोप

मौलाना ने 2022 के चुनाव का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव पर धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस समय भी कई लोगों को आश्वासन दिए गए, लेकिन बाद में स्थिति बदल गई। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद के एक पुराने वीडियो का भी उल्लेख किया, जिसमें उनके रोने की बात कही गई। इसके अलावा पीस पार्टी को लेकर भी उन्होंने आरोप लगाया कि उसे भी बार-बार आश्वासन देकर असमंजस में रखा गया।मौलाना ने कहा कि इस तरह की राजनीति को उन्होंने धोखेबाजी, मक्कारी, झूठ और फरेब बताया और कहा कि ऐसी राजनीति लंबे समय तक नहीं चल सकती।

भाजपा और सपा को लेकर कही ये बात

मौलाना ने कहा कि किसी व्यक्ति के भाजपा में जाने पर उसे धर्म विरोधी और सपा में जाने पर धर्म हितैषी मान लेना सही राजनीतिक पैमाना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को किसी पार्टी या नेता के साथ केवल पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि उसके काम के आधार पर फैसला करना चाहिए।उन्होंने कहा कि अगर कोई नेता मुस्लिम समाज के लिए काम करता है तो उसके साथ खड़ा होना चाहिए, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो।

2027 को लेकर बताई रणनीति

मौलाना ने आगामी 2027 के चुनाव को लेकर मुस्लिम समाज की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उनकी स्पष्ट मांग भागीदारी, हिस्सेदारी और बराबरी है। जो राजनीतिक दल ईमानदारी और वफादारी के साथ यह भागीदारी देगा, मुस्लिम समाज उसके साथ जाने पर विचार करेगा।उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी एक दल के साथ खड़ा होना नहीं है, बल्कि अपने काम और राजनीतिक हिस्सेदारी के आधार पर निर्णय लेना है।

Uttar Pradesh News: सत्ता और टिकट की राजनीति पर सवाल

मौलाना ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि अगर उन्हें अपनी राजनीतिक स्थिति और कुर्सी बचानी है तो उन्हें भागीदारी की बात करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल टिकट देकर लोगों को अपने साथ जोड़ना पर्याप्त नहीं है।उन्होंने समाजवादी पार्टी में मुस्लिम सांसदों और नेताओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। मौलाना ने रामपुर और कैराना जैसे क्षेत्रों का जिक्र करते हुए कहा कि कई मुस्लिम सांसद बनाए गए, लेकिन उनके अनुसार उनमें से कई नेताओं पर दबाव और मुकदमों की स्थिति बनी हुई है।

मुस्लिम सांसदों की स्थिति पर टिप्पणी

मौलाना ने कहा कि कुछ मुस्लिम सांसद खुद अपने घर और राजनीतिक स्थिति को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग खुद मुकदमों और डर की स्थिति से जूझ रहे हैं, वे पूरे समाज की सुरक्षा और समस्याओं के लिए कैसे खड़े होंगे।उन्होंने दिल्ली के एक मामले का भी जिक्र किया, जहां बुलडोजर कार्रवाई के दौरान एक मुस्लिम सांसद के फंसने की बात कही गई। मौलाना ने दावा किया कि उस मामले में अखिलेश यादव ने उन्हें नहीं बचाया, बल्कि किसी अन्य राजनीतिक संपर्क या कथित सेटिंग की वजह से वे बच पाए।

भाजपा के साथ जाने वाले मुसलमानों पर क्या बोले?

मौलाना से जब मुस्लिम समाज के भाजपा के साथ जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि राजनीति में हर व्यक्ति को अपनी सुविधा और राजनीतिक हित के अनुसार फैसला लेने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर कोई मुस्लिम भाजपा के साथ खड़ा होता है और वहां उसे अपने लिए बेहतर स्थिति नजर आती है तो उसे ऐसा करने से रोका नहीं जाना चाहिए।इसी तरह अगर कोई मुस्लिम अखिलेश यादव के साथ खड़ा होता है तो उसे भी अपनी पसंद के अनुसार राजनीति करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। मौलाना ने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल इसलिए गलत नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह किसी विशेष राजनीतिक दल के साथ है।

Uttar Pradesh News: काम के आधार पर होगा फैसला

मौलाना ने कहा कि किसी भी नेता के लिए समर्थन का आधार उसका काम और प्रदर्शन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को यह देखना चाहिए कि कौन नेता उनके मुद्दों पर काम करता है और किसका काम कितना प्रभावी है।उन्होंने कहा कि वह किसी को स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं मानते। उनका कहना है कि जो उनके काम को पूरा करेगा, वे उसके साथ खड़े होंगे।

भाजपा नेताओं के बयानों पर भी उठाए सवाल

मौलाना ने भाजपा नेताओं के कुछ बयानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बिहार के एक सांसद का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उनके बयान में मुस्लिम और यादव समुदाय के लोगों को अपने दरबार में नहीं आने देने की बात कही गई थी।उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से ऐसे बयानों पर नियंत्रण रखने की अपील की। मौलाना ने कहा कि इस तरह के बयानों से सामाजिक माहौल खराब होता है और इससे राजनीतिक दूरी बढ़ती है।

Uttar Pradesh News: आरएसएस को लेकर भी रखी अपनी बात

मौलाना ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को एक संघ के रूप में देखा जा सकता है और देश में रहने वाला हर व्यक्ति उसका हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस सही रास्ते पर आकर काम करती है तो गुलाम सर्वर समेत सभी लोग उसके साथ जुड़ने के लिए तैयार हो सकते हैं।उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की ओर से लगातार दिए जा रहे बयानों से यह संकेत मिलता है कि संघ भी यह महसूस कर रहा है कि देश का एक वर्ग उसे गलत नजर से देखता है। मौलाना के अनुसार, इस धारणा को बदलने के लिए संघ को जमीन पर पहल करनी होगी।

नेताओं को बयानबाजी पर नियंत्रण की सलाह

मौलाना ने कहा कि राजनीतिक नेताओं के बीच संवाद और संपर्क बढ़ना चाहिए। उनके मुताबिक, समाज में कई लोग आपस में बातचीत कर रहे हैं, मिल रहे हैं और दूरी कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक स्तर पर अभी भी कमी दिखाई देती है।उन्होंने कुछ नेताओं के बयानों पर नियंत्रण की जरूरत बताते हुए कहा कि छोटी-छोटी बयानबाजी से माहौल बिगड़ता है। उन्होंने गिरिराज सिंह और महाराष्ट्र के एकनाथ शिंदे सरकार से जुड़े राज सिंह जैसे नेताओं के बयानों का भी संदर्भ दिया और कहा कि ऐसे बयानों पर नियंत्रण होना जरूरी है।

Uttar Pradesh News: मुस्लिम समाज से सड़क पर उतरने को लेकर अपील

मौलाना ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि जिन मुद्दों का उनसे सीधा संबंध नहीं है, उनके लिए सड़क पर उतरने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने वास्तविक मुद्दों पर आवाज उठानी चाहिए और अनावश्यक रूप से माहौल खराब नहीं करना चाहिए।उन्होंने कहा कि भाजपा पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन अगर मुस्लिम समाज भी लगातार केवल धार्मिक पहचान के आधार पर राजनीति करेगा तो इससे ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है।

नौकरी और रोजगार को बताया प्रमुख मुद्दा

मौलाना ने कहा कि उनका मुख्य मुद्दा नौकरी और रोजगार है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को भावनात्मक मुद्दों के बजाय शिक्षा, रोजगार और अपने अधिकारों जैसे विषयों पर ध्यान देना चाहिए।उन्होंने कहा कि 2012 से 2017 के दौरान मुस्लिम समाज को पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं मिली और यादव समुदाय को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने का आरोप लगाया। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि अब मुस्लिम समाज को किसी पार्टी का समर्थन केवल वादों पर नहीं, बल्कि वास्तविक भागीदारी के आधार पर करना चाहिए।

Uttar Pradesh News: हिंदू-मुस्लिम समाज को लेकर भी कही बात

मौलाना ने हिंदू समाज से भी सोचने की अपील की। उन्होंने एक कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि जो अपने पिता का नहीं होता, वह किसी और का भी नहीं हो सकता। उनके अनुसार, यह कहावत गलत नहीं है और समाज में रिश्तों तथा राजनीतिक व्यवहार को समझने के लिए इसे ध्यान में रखना चाहिए।