Engineers Day 2026: सियासत में शब्दों और बयानों को लेकर खूब चर्चा होती है, लेकिन कभी-कभी किसी नाम का सही उच्चारण भी राजनीतिक में चर्चा का केंन्द्र बना जाता है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान महान अभियंता डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के नाम का सही उच्चारण नही कर पाने से लोगों का ध्यान खींचा था। लेकिन दिलचस्प तो बात यह है कि उनके द्वारा कई बार प्रयास के बाद भी नही बोला पाए। जिस महान शख्सियत के नाम का सही उच्चारण नही कर पाने से सियासी चर्चा में आ गया, उनकी जयंती पर ही देश हर साल राष्ट्रीय अभियंता दिवस मनाता है।
15 सितंबर सिर्फ इंजीनियरों को शुभकामनाएं देने का दिन नहीं है। यह उस शख्स को याद करने का अवसर है, जिसने इंजीनियरिंग को महज पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया। भारत रत्न डॉ. एम. विश्वेश्वरैया ने जल प्रबंधन, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंजीनियर्स डे के मौके पर डॉ. विश्वेश्वरैया को श्रद्धांजलि देते हुए देश के सभी इंजीनियरों को शुभकामनाएं दीं और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित किया।
सवाल-1: 15 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है Engineers Day?
भारत में हर साल 15 सितंबर को राष्ट्रीय अभियंता दिवस मनाया जाता है। इसकी वजह है कि इसी दिन 1861 में डॉ. एम. विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था। उनका जन्म तत्कालीन मैसूर रियासत के मुद्देनहल्ली में हुआ था, जो आज कर्नाटक में है। इंजीनियरिंग और प्रशासन के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए उनकी जयंती को इंजीनियर्स डे के तौर पर मनाने का फैसला किया गया। भारत में 1968 से 15 सितंबर को राष्ट्रीय अभियंता दिवस मनाया जा रहा है। तब से यह दिन देश के इंजीनियरों की उपलब्धियों और तकनीकी योगदान को सम्मान देने का अवसर बन गया है। यानी 2026 में भारत 59वां Engineers Day मना रहा है।
Engineers Day 2026: सवाल-2: कौन थे डॉ. एम. विश्वेश्वरैया?
डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया देश के महान सिविल इंजीनियरों में गिने जाते हैं। लेकिन उनकी पहचान केवल इंजीनियर तक सीमित नहीं थी। वह कुशल प्रशासक, योजनाकार और राष्ट्र निर्माण की आधुनिक सोच रखने वाले व्यक्ति थे। उनका सबसे बड़ा योगदान जल संसाधन प्रबंधन, सिंचाई, बांध और बाढ़ नियंत्रण के क्षेत्र में रहा। उनका मानना था कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। यही सोच उनके इंजीनियरिंग कार्यों और प्रशासनिक फैसलों में भी दिखाई देती थी।
सवाल-3: इंजीनियरिंग में उनका बड़ा योगदान क्या था?
विश्वेश्वरैया ने जल प्रबंधन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया। खड़कवासला जलाशय की स्वचालित जल-द्वार प्रणाली, कृष्णराज सागर यानी KRS बांध और हैदराबाद में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े उनके काम को विशेष रूप से याद किया जाता है। उनकी तकनीकी सोच उस दौर से काफी आगे मानी जाती थी। पानी के भंडारण और वितरण से लेकर बाढ़ नियंत्रण तक उन्होंने इंजीनियरिंग को सीधे जनहित से जोड़ने की कोशिश की। यही वजह है कि उन्हें भारतीय इंजीनियरिंग इतिहास की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में शामिल किया जाता है।

Engineers Day 2026: सवाल-4: उन्हें ‘आधुनिक मैसूर का निर्माता’ क्यों कहा जाता है?
इंजीनियरिंग के बाद उनके जीवन का दूसरा महत्वपूर्ण अध्याय प्रशासन से जुड़ा था। 1912 से 1918 तक वह मैसूर रियासत के दीवान रहे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, उद्योग, सिंचाई और आर्थिक विकास से जुड़े कई क्षेत्रों में काम किया। मैसूर में औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थानों के विकास को भी उनके कार्यकाल से जोड़ा जाता है। उनकी सोच साफ थी- देश या राज्य का विकास केवल सड़क, बांध और इमारतों से नहीं होगा। इसके लिए शिक्षा, उद्योग, तकनीक और रोजगार का मजबूत आधार भी जरूरी है। इसी योगदान के कारण उन्हें अक्सर ‘आधुनिक मैसूर का निर्माता’ कहा जाता है।
सवाल-5: डॉ. विश्वेश्वरैया को भारत रत्न कब मिला?
डॉ. एम. विश्वेश्वरैया को उनके असाधारण योगदान के लिए 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने के साथ उनके नाम के साथ एक ऐसी विरासत भी जुड़ी, जो आज तक कायम है। उनका जीवन अनुशासन, मेहनत, तकनीकी दक्षता और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का उदाहरण माना जाता है।
सवाल-6: Engineers Day का महत्व आज के दौर में क्यों बढ़ गया है?
आज इंजीनियरिंग सिर्फ पुल, सड़क और बांध तक सीमित नहीं है। इंजीनियर देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था, रेलवे, अंतरिक्ष कार्यक्रम, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, रक्षा तकनीक और स्वास्थ्य तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत जब बुनियादी ढांचे के विस्तार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में इंजीनियरों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। इस लिहाज से Engineers Day केवल एक पेशेवर समुदाय को बधाई देने का दिन नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए देश की समस्याओं के समाधान में योगदान देने वालों को सम्मान देने का अवसर भी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Engineers Day पर डॉ. एम. विश्वेश्वरैया को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश के इंजीनियरों को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने इंजीनियरों की भूमिका को नवाचार और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए उनके योगदान की सराहना की।
Engineers Day 2026: एक नाम, जिसने इंजीनियरिंग को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा
राहुल गांधी के किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में विश्वेश्वरैया के नाम के उच्चारण को लेकर हुई चर्चा भले ही राजनीतिक बहस का विषय बन गई हो, लेकिन डॉ. विश्वेश्वरैया की असली पहचान किसी राजनीतिक बयान से कहीं बड़ी है। उन्होंने ऐसे समय में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम किया, जब भारत औपनिवेशिक शासन के दौर से गुजर रहा था। इसके बावजूद उन्होंने जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, उद्योग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में ऐसी नींव तैयार करने में योगदान दिया, जिसका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई दिया। इसीलिए 15 सितंबर को जब देश Engineers Day मनाता है, तो यह सिर्फ इंजीनियरों को बधाई देने की रस्म नहीं होती। यह उस सोच को सलाम करने का दिन है, जिसमें तकनीकी ज्ञान को समाज और राष्ट्र के विकास का साधन माना गया।
Happy #EngineersDay to all remarkable engineers, the people who build, innovate and provide solutions for a better tomorrow.
Tributes to Sir M. Visvesvaraya, whose engineering genius and nation-building vision continue to inspire. pic.twitter.com/uIoBwrWPQT
— Narendra Modi (@narendramodi) September 15, 2026








