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US सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध वाले बिल को दी मंजूरी, भारत समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का खतरा

US रूस प्रतिबंध बिल से भारत पर टैरिफ खतरा

Russia Sanctions Bill: अमेरिकी सीनेट ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े एक महत्वपूर्ण बिल को पास कर दिया है। इस बिल के लागू होने के बाद भारत समेत पांच देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का खतरा बढ़ गया है। इस कदम का उद्देश्य यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।सीनेट में हुई वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 12 सीनेटरों ने इसके विरोध में मतदान किया।

रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर निशाना

रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले इस बिल को दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया था। यह बिल मंगलवार को अमेरिकी सीनेट में उस समय पेश किया गया, जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की अमेरिकी संसद भवन के दौरे पर थे।इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस से कच्चे तेल की खरीद को रोकना है। इसके तहत उन देशों पर भारी टैक्स लगाने का प्रावधान है, जो रूस से तेल खरीदते हैं। इनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल हैं।

अमेरिका का मकसद ऊर्जा व्यापार रोकना

अमेरिका इस टैरिफ के जरिए दुनिया के देशों को संदेश देना चाहता है कि वे रूस के साथ ऊर्जा व्यापार कम करें या पूरी तरह बंद कर दें।यह बिल अप्रैल 2025 में पेश किया गया था। लिंडसे ग्राहम ने इसी साल की शुरुआत में कहा था कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण भारत की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ गई है। वहीं, यह बिल ऐसे समय में आया है जब युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली शिपिंग प्रभावित हुई है।भारत पहले इस समुद्री रास्ते से अपने कुल तेल आयात का करीब 40% हिस्सा हासिल करता था। लेकिन युद्ध के कारण आपूर्ति में बाधा आने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल को एक प्रमुख विकल्प के रूप में अपनाया।

भारत पर रूस प्रतिबंध बिल का क्या असर पड़ेगा?
पहले भी लगाए जा चुके हैं टैरिफ

अमेरिका ने अगस्त 2025 में रूस के साथ ऊर्जा व्यापार को लेकर भारत पर 25% टैरिफ लगाया था। इसके बाद जब भारत और रूस के बीच तेल कारोबार जारी रहा, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस टैरिफ को बढ़ाकर 50% कर दिया।ट्रंप की इस नई टैरिफ नीति से दोनों रणनीतिक साझेदार देशों के बीच तनाव बढ़ा और व्यापार वार्ता भी प्रभावित हुई।

होर्मुज संकट के बाद बदली अमेरिकी नीति

28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से दुनियाभर में ऊर्जा संकट पैदा हो गया।इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने कुछ समय के लिए रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी। अमेरिका का कहना था कि इससे रूस को आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा।

भारत ने बढ़ाई रूसी तेल की खरीद

मिडिल ईस्ट संकट के दौरान भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की। जून 2026 में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात 34% तक बढ़ गया।’सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ के मुताबिक, इस आयात की कुल कीमत €4.5 बिलियन थी। यह रूस के कच्चे तेल निर्यात से होने वाली कुल आय का लगभग 36% हिस्सा था।

अब अमेरिका सख्ती की तैयारी में

अब अमेरिका रूसी तेल की खरीद पर पूरी तरह रोक लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अगर यह बिल लागू होता है, तो भारत समेत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर इसका बड़ा आर्थिक असर पड़ सकता है।

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