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Exclusive: मोहम्मद अली को मुलायम सिंह से मिली उम्मीद, अखिलेश यादव ने दिया 15 लाख का चेक बाउंस…

मोहम्मद अली को मुलायम सिंह से मिली उम्मीद

UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में सैफई महोत्सव हमेशा चर्चा का विषय रहा है, लेकिन इसी महोत्सव से जुड़ी एक ऐसी कहानी भी है, जो आज भी दर्द, संघर्ष और अधूरे वादों की याद दिलाती है। यह कहानी है सुल्तानपुर निवासी मोहम्मद अली की, जो कभी समाजवादी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता रहे और 2004 के सैफई महोत्सव की तैयारियों के दौरान हुए एक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए। मोहम्मद अली के घायल होने के बाद वादे तो बहुत किए गए थे लेकिन ये वादे न तो उस वक्त की मुलायम सरकार पूरे कर सकती और न ही आज विपक्ष में बैठे नेता जी के बैठे अखिलेश यादव। इतना ही नहीं आज मोहम्मद अली जब न्याय के लिए सपा सरकार में बैठे बड़े-बड़े नेताओं से फोन कर बात करते है तो मंत्री जी ये कहकर फोन काट देते है कि हम नेता जी से बात करेंगे। तो चलिए विस्तार से बताते है आपको मोहम्मद अली की दर्द भरी कहानी…

सैफई महोत्सव में क्या हुआ था?

खबर इंडिया के रिपोर्टर हिमांशु गर्ग से बात करते हुए मोहम्मद अली बताते है कि दिसंबर 2004 में सैफई महोत्सव के लिए होर्डिंग लगाए जा रहे थे। इसी दौरान लोहे का फ्रेम ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली की लाइन से टकरा गया। करंट लगने से बहराइच के दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मोहम्मद अली बुरी तरह झुलस गए। जिन्हें पहले लखनऊ, फिर दिल्ली के एम्स और बाद में मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आगे मोहम्मद अली कहते है हादसे के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। आज भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियां हैं। उनका दावा है कि इलाज के दौरान पत्नी को अपने गहने बेचने पड़े और पिता को जमीन गिरवी रखनी पड़ी। परिवार आर्थिक तंगी से जूझता रहा और वर्षों तक इलाज चलता रहा।

आर्थिक सहायता देने के लिए मंजूरी
                                               आर्थिक सहायता देने के लिए मंजूरी
UP News: सपा ने किया था 15 लाख की मदद का वादा

मोहम्मद अली बताते है कि हादसे के बाद उन्हें समाजवादी पार्टी द्वारा आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन पूरी मदद कभी नहीं मिली। मोहम्मद अली का दावा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹15 लाख 5 हजार की आर्थिक सहायता देने के लिए मंजूरी दी थी। लेकिन यह सहायता उन्हें कभी नहीं मिल सकी। वर्षों तक उन्होंने अधिकारियों और पार्टी नेताओं के चक्कर लगाए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। इसी को लेकर उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। हालांकि अदालत ने उनकी याचिका तकनीकी आधार पर खारिज करते हुए उन्हें उचित मंच पर जाने की सलाह दी।

2005 में मृत घोषित किया, 2021 में बना दिया जिला सचिव

ये मामला यहीं शांत नहीं हुआ। बात करते-करते जब खबर इंडिया के रिपोर्टर ने मोहम्मद अली की कहानी को और गहराई से जानने की कोशिश की तो आगे मोहम्मद अली ने जो बताया वो सुनकर खुद रिपोर्ट भी हक्का बक्का रह गया क्योंकि मोहम्मद अली ने समाजवादी पार्टी पर एक और गंभीर आरोप लगाते हुए दावा है कि वर्ष 2005 में उन्हें पार्टी के रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया था, जबकि वह जीवित थे और इलाज के लिए संघर्ष कर रहे थे। लेकिन यहां हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2021 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें (मोहम्मद अली) को सुल्तानपुर का जिला सचिव भी नियुक्त कर दिया था। बात थोड़ी विचलित करने वाली थी लेकिन सत्य थी। इस बात का प्रमाण आप नीचे फोटो में देख सकते है।

2005 में किया मृत घोषित
                                                 2005 में किया मृत घोषित

जिसके बाद मोहम्मद अली सवाल उठाते हुआ कहते है कि यदि उन्हें 2005 में मृत मान लिया गया था, तो फिर 2021 में उन्हें संगठन में जिला सचिव की जिम्मेदारी किस आधार पर सौंपी गई। उनका कहना है कि यह विरोधाभास पूरे मामले पर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े करता है।

2021 में बनाया जिला सचिव
                                             2021 में बनाया जिला सचिव
2024 में चेक दिया लेकिन उसमें भी घोटाला किया

करीब दो दशक के इंतजार के बाद मोहम्मद अली को उम्मीद की एक किरण दिखाई दी। उनका दावा है कि 2024 में उन्हें ₹15 लाख 5 हजार का चेक दिया गया था। लेकिन जब वह बैंक पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि संबंधित खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है। जिसके बाद मोहम्मद अली ने कई बात नेता जी से सम्पर्क किया लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इतने आरोपों के बावजूद मोहम्मद अली आज भी समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं। मोहम्मद अली बताते है कि उन्होंने इकरा हसन, अबुल आजमी समेत कई बड़े सपा नेताओं से कई बार आर्थिक सहायता के लिए सम्पर्क किया लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। वह कहते हैं कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने अधिकार और परिवार के भविष्य के लिए है।

2024 में सपा ने दिया था ₹15 लाख 5 हजार का चेक
                                             2024 में सपा ने दिया था ₹15 लाख 5 हजार का चेक

वह कहते है कि  उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। एक बेटी का निकाह हो चुका, दो की जिम्मेदारी बाकी है। हेड इंजरी से काम नहीं कर पाते, नाक से खून आता है, PGI लखनऊ के चक्कर काटते हैं। पत्नी और बेटियां घरों में काम करके गुजारा चला रही हैं। इसके बावजूद अभी तक उन्हें सपा से कोई मदद नहीं मिली है। लेकिन आज भी उन्हें उम्मीद है कि पार्टी का कोई बड़ा नेता आगे आएगा और वर्षों से लंबित आर्थिक सहायता दिलाने में मदद करेगा।

UP News: 22 साल बाद भी खड़े होते कई सवाल?

करीब 22 साल पहले हुआ सैफई महोत्सव हादसा आज भी कई सवाल छोड़ जाता है। एक तरफ हादसे में जान गंवाने वालों के परिवार हैं, तो दूसरी तरफ मोहम्मद अली जैसे पीड़ित हैं, जो दावा करते हैं कि उन्होंने इलाज के लिए सब कुछ गंवा दिया, लेकिन आज तक उन्हें पूरा न्याय नहीं मिला। अंत में मोहम्मद अली अपनी बात ये कहते हुए खत्म कर देते है कि अब सरकार बदल चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सत्ता संभाल रहे है। हमें बस अब उन्हीं से उम्मीद है वहीं हमारी मदद कर सकते है। ताकि हम अपनी दोनों बेटियों का निकाह कर सके।

अब देखें वो तस्वीरें जो इस बात की गवाह है कि मोहम्मद अली समाजवादी पार्टी का पुराना सिपाही है…

मंच पर स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव और गाना गाते मोहम्मद अली
                                           मंच पर स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव और गाना गाते मोहम्मद अली

अबुल आजमी के साथ मोहम्मद अली
                                                        अबुल आजमी के साथ मोहम्मद अली

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