Gallbladder Disease: डायबिटीज को अक्सर केवल ब्लड शुगर बढ़ने वाली बीमारी माना जाता है, लेकिन इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर मेटाबॉलिज्म, हार्मोनल संतुलन और शरीर के विभिन्न अंगों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज का संबंध पाचन तंत्र और पित्ताशय (गॉल ब्लैडर) की सेहत से भी जुड़ा हुआ है।
Gallbladder Disease: डायबिटीज और पित्ताशय की बीमारी का क्या है संबंध-
आकाश हेल्थकेयर के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, हेपेटोलॉजी एवं थेराप्यूटिक एंडोस्कोपी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट एवं डायरेक्टर डॉ. शरद मल्होत्रा के अनुसार, डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड शुगर शरीर में फैट के उपयोग और स्टोरेज को प्रभावित करते हैं। इससे कई मरीजों में मोटापा, खासकर पेट के आसपास चर्बी बढ़ने की समस्या होती है, जो पित्त की पथरी बनने का जोखिम बढ़ा सकती है।
Gallbladder Disease: कैसे बढ़ता है पथरी बनने का खतरा-
विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से शरीर में सूजन बढ़ सकती है और नसों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसका असर पित्ताशय की सामान्य गतिविधि पर भी पड़ता है, जिससे पित्त लंबे समय तक जमा रह सकता है और पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा कम शारीरिक गतिविधि, अनहेल्दी डाइट और बढ़ता वजन भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं।
रिसर्च में क्या सामने आया-
साल 2023 में Gastroenterology Review में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित लोगों में पित्त की पथरी होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक पाया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि इंसुलिन थेरेपी लेने वाले मरीजों में पथरी बनने की संभावना अपेक्षाकृत ज्यादा देखी गई। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके पीछे की वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और इस विषय पर आगे और शोध की जरूरत है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज-
पित्ताशय में पथरी होने पर पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में दर्द, खाना खाने के बाद दर्द बढ़ना, मतली, उल्टी, पेट फूलना और अपच जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यदि पथरी पित्त नली में रुकावट पैदा कर दे तो त्वचा और आंखों में पीलापन, तेज पेट दर्द और बुखार जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
पित्ताशय को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये उपाय-
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ वजन बनाए रखना आवश्यक है। फाइबर से भरपूर फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों का सेवन करें। वहीं तला-भुना, अधिक वसा वाला और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं। वजन कम करना हो तो धीरे-धीरे और स्वस्थ तरीके से करें, क्योंकि तेजी से वजन घटाने से भी पित्त की पथरी का खतरा बढ़ सकता है।
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