United Kingdom Countries: यूनाइटेड किंगडम (UK) में अलगाव की सुगबुगाहट एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। स्कॉटलैंड समेत तीन देशों के UK से अलग होने की चर्चा के बीच ब्रिटिश राजनीति में हलचल बढ़ गई है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा है कि यदि स्कॉटलैंड में नए जनमत संग्रह के पक्ष में जनता की ओर से स्पष्ट समर्थन मिलता है, तो उनकी सरकार इसकी अनुमति देने से पीछे नहीं हटेगी। स्कॉटलैंड के नेता जॉन स्विनी ने भी कहा है कि स्कॉटलैंड के भविष्य का फैसला वहां की जनता ही करेगी। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड UK से अलग हो जाते हैं, तो अकेले इंग्लैंड की ताकत, क्षेत्रफल, आबादी और अर्थव्यवस्था कितनी रह जाएगी?
United Kingdom Countries: तीन देशों के अलग होने की चर्चा क्यों तेज हुई-
ब्रिटिश संसद में प्रधानमंत्री के इस रुख के बाद UK के संभावित विभाजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्कॉटलैंड के साथ वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में भी अलग पहचान और अधिक स्वायत्तता की मांग समय-समय पर उठती रही है। प्रधानमंत्री का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछली ब्रिटिश सरकारें स्कॉटलैंड की आजादी के लिए नए जनमत संग्रह के विकल्प को लेकर काफी सख्त रही हैं। ऐसे में सरकार के रुख में बदलाव से स्वतंत्रता समर्थक ताकतों को नई ऊर्जा मिल सकती है।
United Kingdom Countries: यूनाइटेड किंगडम और ग्रेट ब्रिटेन में क्या अंतर है-
अक्सर लोग यूनाइटेड किंगडम और ग्रेट ब्रिटेन को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में अंतर है। यूनाइटेड किंगडम चार देशों का संघ है- इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड। वहीं, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स मिलकर ग्रेट ब्रिटेन कहलाते हैं। जब उत्तरी आयरलैंड भी इसमें शामिल होता है, तब इसे आधिकारिक तौर पर यूनाइटेड किंगडम कहा जाता है।
UK टूटने पर कितना रह जाएगा इंग्लैंड का क्षेत्रफल-
वर्तमान में यूनाइटेड किंगडम का कुल क्षेत्रफल करीब 2,42,749 वर्ग किलोमीटर है। इसमें इंग्लैंड की हिस्सेदारी लगभग 54 फीसदी है।अगर स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड अलग हो जाते हैं, तो इंग्लैंड का क्षेत्रफल करीब 1,30,309 वर्ग किलोमीटर रह जाएगा। यानी इंग्लैंड लगभग 46 फीसदी मौजूदा UK क्षेत्र खो देगा। इसके बावजूद इंग्लैंड एक बड़ा देश बना रहेगा और उसका क्षेत्रफल कई यूरोपीय देशों के बराबर या उनसे अधिक होगा।
आबादी में इंग्लैंड की स्थिति कितनी मजबूत-
क्षेत्रफल में बड़ी कमी आने के बावजूद आबादी के मामले में इंग्लैंड को उतना बड़ा झटका नहीं लगेगा। करीब 6.9 करोड़ की UK आबादी में 5.8 करोड़ से अधिक लोग इंग्लैंड में रहते हैं। इसका मतलब है कि UK की कुल आबादी का 84 फीसदी से ज्यादा हिस्सा अकेले इंग्लैंड में रहता है। इसलिए अलगाव के बाद भी इंग्लैंड की जनसंख्या उसे एक मजबूत राष्ट्र बनाए रखने के लिए पर्याप्त होगी।
अर्थव्यवस्था में इंग्लैंड का कितना दबदबा-
आर्थिक मोर्चे पर भी इंग्लैंड की स्थिति बेहद मजबूत है। UK की कुल अर्थव्यवस्था में इंग्लैंड का योगदान सबसे बड़ा है और अनुमान के मुताबिक कुल GDP का करीब 85 से 90 फीसदी हिस्सा इंग्लैंड से आता है। दुनिया के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में शामिल लंदन भी इंग्लैंड में ही स्थित है। इसलिए UK के विभाजन की स्थिति में इंग्लैंड के पास मजबूत वित्तीय और आर्थिक आधार बना रहेगा। दूसरी ओर, अलग होने वाले देशों को शुरुआती दौर में मुद्रा, व्यापार, सरकारी संस्थानों और आर्थिक नीतियों से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
सेना और परमाणु ताकत का क्या होगा-
UK के विभाजन की स्थिति में सैन्य ताकत का बंटवारा एक बड़ा सवाल होगा। ब्रिटेन की सैन्य कमान और अधिकांश प्रमुख संस्थान लंदन में हैं। ऐसे में इंग्लैंड के पास ब्रिटिश सैन्य ढांचे का बड़ा हिस्सा बने रहने की संभावना है। हालांकि, परमाणु हथियारों से जुड़ा मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण होगा। ब्रिटेन की परमाणु पनडुब्बियां स्कॉटलैंड के फासलेन नौसैनिक अड्डे पर तैनात हैं। स्कॉटलैंड के अलग होने पर इन पनडुब्बियों के लिए नया बेस तैयार करना पड़ सकता है, जिससे ब्रिटेन के बचे हुए हिस्से पर भारी आर्थिक और रणनीतिक दबाव पड़ सकता है।
UNSC की वीटो सीट का क्या होगा-
यूनाइटेड किंगडम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का स्थायी सदस्य है और उसके पास वीटो पावर है। अगर UK का विभाजन होता है, तो यह सवाल उठेगा कि स्थायी सीट और वीटो अधिकार किसके पास रहेंगे। इसे लेकर कोई स्वतः तय नियम नहीं है। इसलिए यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी बातचीत का विषय बन सकता है। रूस का उदाहरण अक्सर दिया जाता है, लेकिन UK और सोवियत संघ की परिस्थितियां अलग थीं, इसलिए इसे निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।
जॉन स्विनी ने क्या कहा-
स्कॉटलैंड के नेता जॉन स्विनी ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के रुख का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि पहले जहां स्कॉटलैंड के भविष्य पर जनमत संग्रह के मुद्दे को पूरी तरह बंद माना जाता था, वहीं अब यह स्वीकार किया जा रहा है कि स्कॉटलैंड के लोग ही अपने भविष्य का फैसला कर सकते हैं। स्विनी के मुताबिक, 2014 के बाद यह पहली बार है जब किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने खुले तौर पर यह संकेत दिया है कि जनता का स्पष्ट समर्थन मिलने पर नए जनमत संग्रह की अनुमति दी जा सकती है।
UK बिखरा तो इंग्लैंड पर क्या असर पड़ेगा-
अगर भविष्य में UK का विभाजन होता है, तो इंग्लैंड क्षेत्रफल के लिहाज से करीब आधी जमीन खो देगा, लेकिन आबादी और अर्थव्यवस्था के मामले में उसकी स्थिति मजबूत बनी रह सकती है। हालांकि, ब्रिटेन की वैश्विक राजनीतिक और सैन्य ताकत पर इसका असर पड़ना तय माना जाएगा। परमाणु पनडुब्बियों के बेस, सरकारी संस्थानों, संपत्तियों, कर्ज, व्यापार समझौतों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर लंबे समय तक बातचीत करनी पड़ सकती है। इसलिए UK का टूटना केवल नक्शे पर सीमाएं बदलने का मामला नहीं होगा, बल्कि इससे ब्रिटेन और उसके चारों हिस्सों की राजनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक भूमिका पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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