CJP Protest: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज FIR के बीच सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने रुचिका सिंह का बचाव करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। सौरव दास ने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है, तो उसकी आलोचना की जा सकती है, लेकिन ऐसे मामलों में आपराधिक कानून और पुलिस तंत्र का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को इस तरह पुलिस के जरिए निशाना बनाना सही नहीं है। क्या इस देश में गाली देना अब आपराधिक अपराध बन गया है? लोग रोजमर्रा की बातचीत में भी अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
कई सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले लंबित
सौरव दास ने लोकसभा सांसदों का जिक्र करते हुए कहा कि कई सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं, लेकिन उन मामलों पर उतनी सख्ती नहीं दिखाई जाती। दास ने आरोप लगाया कि किसी एक व्यक्ति की टिप्पणी को आधार बनाकर उसे निशाना बनाना उचित नहीं है और इसकी आलोचना होनी चाहिए। सौरव दास ने सरकार और पुलिस से अपील की कि छात्रों को परेशान करना बंद किया जाए और रुचिका सिंह को भी अनावश्यक रूप से निशाना न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस का कथित दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।
CJP Protest: अब जानें क्या है मामला?
जानकारी के मुताबिक, रुचिका सिंह ने 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस संबंध में बुधवार को शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी टिप्पणी से प्रधानमंत्री पद की गरिमा को ठेस पहुंची और इससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका पैदा हुई। इसके बाद नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना में जीरो FIR दर्ज की गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया है। FIR में शांति भंग करने के लिए उकसाने, सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान देने और मानहानि से संबंधित आरोप शामिल हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
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