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हल्द्वानी हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल मलिक की जमानत बरकरार रखी, UAPA पर उठाए सवाल

UAPA Bail

UAPA Bail: वर्ष 2024 के हल्द्वानी बनभूलपुरा हिंसा मामले में मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगाए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल भीड़ द्वारा पुलिस थाने में आग लगाने के आधार पर UAPA लागू करना उचित कैसे माना जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था और आतंकवाद से जुड़े मामलों के कानूनी मानदंड अलग-अलग हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत में हस्तक्षेप से किया इनकार

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में जमानत के आदेश में हस्तक्षेप तभी किया जाना चाहिए जब उसके लिए ठोस कानूनी आधार मौजूद हो। अदालत ने माना कि हाई कोर्ट के आदेश में कुछ दलीलें विस्तृत नहीं थीं, लेकिन केवल इसी वजह से जमानत रद्द करने का आधार नहीं बनता। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार की अपील को खारिज करते हुए अब्दुल मलिक की जमानत को यथावत रखा। इसके साथ ही अदालत ने मामले में UAPA की धाराएं लगाए जाने के औचित्य पर भी सरकार से सवाल किए।

UAPA Bail: UAPA लगाने पर अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई भीड़ पुलिस थाने में आग लगा देती है तो केवल इस आधार पर UAPA लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि कानून-व्यवस्था की समस्या और आतंकवाद से जुड़े अपराधों में स्पष्ट अंतर है। पीठ ने उत्तराखंड सरकार से पूछा कि किन परिस्थितियों में इस मामले को UAPA के दायरे में लाया गया। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में कानून का प्रयोग तथ्यों और कानूनी कसौटियों के आधार पर होना चाहिए।

हाई कोर्ट ने किन आधारों पर दी थी जमानत

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 16 अप्रैल 2026 को अब्दुल मलिक को जमानत देते हुए कहा था कि जांच के दौरान उपलब्ध सामग्री से यह स्पष्ट नहीं होता कि घटना के समय वह मौके पर मौजूद था। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा था कि उसके बेटे अब्दुल मोईद सहित एक अन्य सह-आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। अब्दुल मलिक पर 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में हुई हिंसा के मामले में भारतीय दंड संहिता, UAPA, आर्म्स एक्ट और अन्य कानूनों के तहत कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

UAPA Bail: उत्तराखंड सरकार ने जमानत का किया था विरोध

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि अब्दुल मलिक इस हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता था और हाई कोर्ट ने पर्याप्त कारण बताए बिना उसे जमानत दे दी। उन्होंने कहा कि घटना स्थल पर उसकी शारीरिक मौजूदगी न होना उसकी भूमिका को कम नहीं करता। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर विचार करते समय लागू होने वाली कड़ी शर्तों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों से सहमत होने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट के जमानत आदेश को बरकरार रखा।

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