Home » राजनीति » सरकार को परिसीमन बिल के लिए पर्याप्त समर्थन, पीएम मोदी ने दिए विशेष सत्र के संकेत- सूत्र

सरकार को परिसीमन बिल के लिए पर्याप्त समर्थन, पीएम मोदी ने दिए विशेष सत्र के संकेत- सूत्र

परिसीमन और आरक्षण पर बड़ा अपडेट

Delimitation Bill: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एनडीए (NDA) के सांसदों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने कई अहम राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण बिल को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए गए। साथ ही सांसदों को युवाओं से जुड़ने, विकास कार्यों में तेजी लाने और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने की सलाह दी।

परिसीमन बिल पर सरकार का भरोसा

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने बैठक में संकेत दिया कि सरकार के पास परिसीमन बिल पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन मौजूद है। बताया गया कि इस बिल के समर्थन में करीब 366 सांसदों का आंकड़ा जुट चुका है।अगर मौजूदा संसद सत्र में यह संभव नहीं हो पाया तो सरकार इसी महीने विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल को आगे बढ़ा सकती है।सांसदों को भरोसा दिलाया गया कि परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान उनके निर्वाचन क्षेत्रों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, डीएमके ने भी एनडीए का समर्थन करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं।

प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे खास तौर पर Gen-Z और युवाओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखें। उन्हें सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दें और बातचीत के माध्यम से युवाओं में सरकार को लेकर बनी नाराजगी या नकारात्मक सोच को कम करने का प्रयास करें।

शिवसेना (शिंदे) सांसदों को दिया भरोसा

बैठक में प्रधानमंत्री ने शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसदों से कहा कि पार्टी से जुड़े सभी फैसले संविधान के अनुसार लिए गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद उनकी सांसद सदस्यता पर कोई खतरा नहीं है।उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी सांसद को विकास कार्यों या केंद्र सरकार से जुड़े किसी भी विषय पर परेशानी आती है, तो वे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या प्रधानमंत्री से संपर्क कर सकते हैं।

इस बैठक में शिवसेना (शिंदे गुट) के 7 सांसद शामिल हुए। इसके अलावा एनसीपीआई के 20 सांसद और एनसीपी (अजित पवार गुट) के सांसद भी बैठक में मौजूद रहे। उपेंद्र कुशवाहा समेत करीब 45 सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नाश्ते पर चर्चा की।

विकास कार्यों में तेजी लाने का संदेश

प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार की ताकत और संसाधनों का प्रभावी उपयोग करें। यदि किसी परियोजना में कोई बाधा आती है तो सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क करें।बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनका हालचाल भी जाना। उन्होंने धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबाळकर के स्वास्थ्य और योगाभ्यास के बारे में भी जानकारी ली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वस्थ रहना जरूरी है, क्योंकि अच्छे स्वास्थ्य के साथ ही देश की बेहतर सेवा की जा सकती है। उन्होंने सभी सांसदों को नियमित योग, व्यायाम और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी।प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे लगातार जनता के बीच जाएं और गरीबों, मजदूरों तथा किसानों से मिलते रहें। उनकी समस्याओं को सुनें और उनके समाधान के लिए पूरी कोशिश करें।

हर मुद्दे पर अपडेट रहने की सलाह

प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी सांसदों को बदलते राजनीतिक और सामाजिक माहौल की जानकारी होनी चाहिए। उन्हें हर महत्वपूर्ण विषय पर अपडेट रहना चाहिए ताकि वे जनता के बीच प्रभावी ढंग से अपनी बात रख सकें।उन्होंने कहा कि पहले पूर्वोत्तर राज्यों का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया था, लेकिन अब सरकार पूरे देश के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को भी समान प्राथमिकता दे रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एनडीए में किसी भी दल की अहमियत उसके सांसदों की संख्या से तय नहीं होती। चाहे किसी पार्टी का केवल एक सांसद ही क्यों न हो, उसे भी उतना ही सम्मान दिया जाता है जितना बड़े दलों को मिलता है।उन्होंने सभी सहयोगी दलों से मिलकर एनडीए को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।

संसद की कार्यवाही पर जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद की कार्यवाही में लगातार हो रहे हंगामे पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है और इसकी कार्यवाही सुचारु रूप से चलनी चाहिए।उन्होंने कहा कि लगातार होने वाले विरोध और हंगामे के कारण नए सांसदों को सदन में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो उनके साथ अन्याय है।प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने संसद को सुचारु रूप से चलाने के लिए विपक्ष से बातचीत की है, लेकिन लगातार हंगामे के कारण न तो विपक्ष के सांसद अपनी बात रख पा रहे हैं और न ही सत्ता पक्ष के सांसदों को पर्याप्त अवसर मिल रहा है।

यह भी पढ़े- यमन और सऊदी अरब में बड़े हमले, 58 सैनिकों की मौत, कई लोग घायल