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उखड़ी सड़कों और जलभराव पर CM मोहन यादव सख्त, तीन स्तरीय कंट्रोल रूम बनाए

CM Mohan Yadav:

CM Mohan Yadav: मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति और उससे पैदा हुई समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रियों और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश में उखड़ी सड़कों, जलभराव, बाढ़ की आशंका और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने खराब सड़कों की जरूरत के अनुसार तत्काल मरम्मत कराने और बारिश के बाद सड़कों के संधारण के लिए पहले से प्लानिंग करने के निर्देश दिए।

CM Mohan Yadav: प्रदेश में औसत से 15% कम बारिश-

मुख्यमंत्री को बैठक में बताया गया कि 1 जून से 10 अगस्त तक प्रदेश में सामान्य 571 मिमी बारिश के मुकाबले 483 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। यह सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग आधे जिलों में सामान्य बारिश हुई है, जबकि कुछ जिलों में कम वर्षा की स्थिति बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 513.20 मिमी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 459.80 मिमी बारिश दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों और आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए जरूरी तैयारियां पूरी रखी जाएं।

CM Mohan Yadav: धान की 84% बोवनी पूरी-

बैठक में फसलों की बोवनी की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में धान की करीब 84 प्रतिशत बोवनी पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही फसल बीमा योजना से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही सिंचाई के दौरान किसानों को निर्बाध बिजली आपूर्ति देने और अतिवृष्टि या जलभराव से प्रभावित फसलों का पारदर्शी सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं।

बांधों में 49% जलभराव, पिछले साल 75% था-

10 अगस्त तक प्रदेश के बांधों में करीब 49 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। यह पिछले पांच वर्षों के औसत 59 प्रतिशत से करीब 10 प्रतिशत कम है। वहीं पिछले वर्ष इसी अवधि में बांधों में जलभराव करीब 75 प्रतिशत था। प्रदेश में 50 प्रतिशत या उससे कम जलभराव वाले 36 जलाशय हैं, जबकि 50 से 90 प्रतिशत के बीच जलभराव वाले जलाशयों की संख्या 18 बताई गई है।

शहरों में जलभराव से निपटने तीन स्तरीय कंट्रोल रूम-

शहरी क्षेत्रों में अतिवृष्टि, जलभराव और बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति से निपटने के लिए राज्य, संभाग और जिला स्तर पर तीन स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से राहत और बचाव कार्य शुरू करना है। कंट्रोल रूम के जरिए जल निकासी, प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, भोजन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा जैसी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

जर्जर भवनों की होगी पहचान-

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने जर्जर और क्षतिग्रस्त भवनों को चिन्हित कर समय रहते जरूरी सुरक्षात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा आंधी-तूफान में सड़कों पर गिरे पेड़ों को तत्काल हटाकर यातायात सुचारू करने और वज्रपात से जुड़ी घटनाओं में तेजी से राहत एवं बचाव कार्य करने पर भी जोर दिया गया है।

डूडा के परियोजना अधिकारी होंगे नोडल अफसर-

प्रत्येक जिले में जिला शहरी विकास अभिकरण (डूडा) के परियोजना अधिकारी को जिला स्तरीय कंट्रोल रूम का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। ये अधिकारी जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर अतिवृष्टि और जलभराव से प्रभावित लोगों तक जल्द सहायता पहुंचाएंगे।

मौसम विभाग के संपर्क में रहेंगे कंट्रोल रूम-

कंट्रोल रूम मौसम विज्ञान केंद्र के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे। मौसम के पूर्वानुमान और चेतावनी संदेश संबंधित नगरीय निकायों तक समय पर पहुंचाए जाएंगे, ताकि संभावित आपदा के प्रभाव को कम किया जा सके।

CM के प्रमुख निर्देश-

– बारिश और जल संग्रहण की नियमित निगरानी की जाए।
– प्रमुख जल स्रोतों और तालाबों के जलस्तर पर नजर रखी जाए।
– राज्य और जिला स्तर पर आपदा कंट्रोल रूम सक्रिय रहें।
– बाढ़ और जलभराव संभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रहे।
– जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों की व्यवस्था की जाए।
– बांधों से पानी छोड़े जाने पर निचले इलाकों में समय रहते चेतावनी जारी हो।
– प्रभावित फसलों का पारदर्शी सर्वे कर किसानों को राहत दिलाई जाए।
– कालाबाजारी की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
– बारिश के बाद खराब सड़कों की मरम्मत तेजी से कराई जाए।
– बारिश के मौसम में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध रहें

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