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सेहत को लेकर चिंता, MP में एनालॉग पनीर बैन: उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक; 3 राज्यों में पहले ही प्रतिबंध

एनालॉग पनीर पर MP सरकार का बड़ा फैसला

Analogue Paneer: महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को गुजरात रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री निवास पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए।

एनालॉग पनीर क्या है?

एनालॉग पनीर को सामान्य डेयरी पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है। इसे बनाने में दूध के साथ या उसकी जगह वनस्पति वसा, पाम ऑयल, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।यह जरूरी नहीं कि एनालॉग पनीर पूरी तरह नकली हो, लेकिन इसे डेयरी पनीर के नाम पर बेचने में समस्या है, क्योंकि इसमें पारंपरिक पनीर की तरह केवल दूध का इस्तेमाल नहीं होता।

बाजार में क्यों बढ़ी मांग?

एनालॉग पनीर की कीमत सामान्य डेयरी पनीर से काफी कम होती है। जहां डेयरी पनीर की कीमत करीब 350 से 450 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है, वहीं एनालॉग पनीर लगभग 150 से 250 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध हो जाता है।कम कीमत के कारण होटल, रेस्तरां और कैटरिंग कारोबार में इसका इस्तेमाल ज्यादा होने की बात सामने आई है। इसी वजह से बाजार में इसकी खपत भी तेजी से बढ़ी है।

रोज 300 से 400 क्विंटल खपत का अनुमान

मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की रोजाना आवक और बिक्री करीब 300 से 400 क्विंटल होने का अनुमान है। इस हिसाब से प्रदेश में हर महीने लगभग 9 हजार से 12 हजार क्विंटल, यानी करीब 900 से 1200 टन एनालॉग पनीर की खपत होने की बात सामने आई है।इतनी बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री को देखते हुए सरकार ने अब इस पर सख्ती करने का फैसला लिया है।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है, जैसा कि अन्य राज्यों ने भी किया है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में प्राकृतिक तरीके से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर काम करेगी और प्राकृतिक रूप से ही पनीर तैयार करने को बढ़ावा दिया जाएगा।

एनालॉग पनीर की पहचान कैसे करें?

एनालॉग पनीर खरीदते समय पैकेट पर दिए गए FSSAI लोगो और Ingredients यानी सामग्री की सूची को ध्यान से देखना चाहिए।अगर सामग्री की सूची में Analogue, Imitation या Vegetable Fat जैसे शब्द लिखे हैं, तो यह सामान्य डेयरी पनीर नहीं है। वहीं, खुले में बिकने वाले या बिना लेबल वाले पनीर को खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।

सेहत को लेकर क्यों चिंता?

एनालॉग पनीर को लेकर मुख्य चिंता इसकी गुणवत्ता और इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री से जुड़ी है। अगर इसमें खराब गुणवत्ता वाला तेल, अधिक हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल ऑयल या खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं होने वाली सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।इसी वजह से इसकी गुणवत्ता, लेबलिंग और बिक्री को लेकर निगरानी की जरूरत बताई जा रही है।

मानवाधिकार आयोग ने भी जताई नाराजगी

एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने भी नाराजगी जताई है। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों को पत्र लिखने का फैसला किया है।आयोग की ओर से राज्यों से इस तरह के उत्पाद की बिक्री और इसके कारण लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के बारे में जानकारी मांगे जाने की संभावना है।

FSSAI से मांगा जा रहा जवाब

आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने एनालॉग पनीर को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने इसे घातक बताते हुए कहा कि इस मामले में FSSAI को नोटिस देकर पूछा जा रहा है कि इस तरह के पनीर को बेचने की अनुमति क्यों दी जा रही है।कानूनगो ने सवाल किया कि अगर सिगरेट के पैकेट पर यह लिख दिया जाए कि वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, तो क्या इससे उसका नुकसान खत्म हो जाता है? उन्होंने कहा कि जब तीन राज्यों की सरकारों ने एनालॉग पनीर के खिलाफ फैसला लिया है, तो दूसरे राज्यों को भी इस पर निर्णय लेना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि केवल एरोबिक स्टार्च टेस्ट के जरिए एनालॉग पनीर की पहचान नहीं हो पाती है। ऐसे में इसकी जांच के लिए प्रभावी और बेहतर व्यवस्था की जरूरत है।

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