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हरिद्वार का दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर: जहां माता सती ने किया था आत्मदाह

कनखल का दक्ष महादेव मंदिर

Daksha Mahadev Temple: देवभूमि उत्तराखंड का हर कोना भगवान शिव से जुड़ी मान्यताओं और पौराणिक कथाओं को अपने भीतर समेटे हुए है। हरिद्वार के पवित्र कनखल क्षेत्र में स्थित दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर भी ऐसी ही एक प्राचीन धार्मिक जगह है। यह मंदिर माता सती के आत्मदाह और भगवान शिव के रौद्र रूप से जुड़ी पौराणिक घटना के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। खासतौर पर सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की बड़ी भीड़ पहुंचती है। मान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर भगवान शिव के शांत और रौद्र, दोनों स्वरूपों की अनुभूति की जा सकती है।

सीएम धामी ने साझा किया मंदिर का वीडियो

मंगलवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर की भव्यता का उल्लेख किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का एक वीडियो साझा किया।सीएम धामी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हरिद्वार के पवित्र कनखल में स्थित दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था और भक्ति का दिव्य केंद्र है। राजा दक्ष प्रजापति से जुड़ा यह प्राचीन तीर्थ सावन के महीने में शिव भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।उन्होंने श्रद्धालुओं से हरिद्वार यात्रा के दौरान मंदिर में दर्शन करने और भगवान शिव का आशीर्वाद लेने की अपील भी की।

राजा दक्ष ने कराया था विशाल यज्ञ

पौराणिक मान्यता के अनुसार, राजा दक्ष प्रजापति ने इसी स्थान पर एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया था। इस यज्ञ में उन्होंने भगवान शिव और अपनी पुत्री माता सती को आमंत्रित नहीं किया था।माता सती को जब इस बात का पता चला तो वह बिना निमंत्रण के यज्ञ में पहुंचीं। वहां भगवान शिव के प्रति अपने पिता के व्यवहार और अपमानजनक रवैये से उन्हें गहरा दुख हुआ।कहा जाता है कि इस अपमान से आहत होकर माता सती ने यज्ञ कुंड में योगाग्नि के माध्यम से अपने शरीर का त्याग कर दिया।

सती के आत्मदाह के बाद शिव ने किया तांडव

माता सती के आत्मदाह की खबर मिलने के बाद भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। पौराणिक कथा के अनुसार, उन्होंने सती के शरीर को लेकर भयंकर तांडव किया। उनके इस रौद्र रूप से पूरी सृष्टि में हलचल मच गई।स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल किया। मान्यता है कि सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के 51 हिस्से हुए, जो अलग-अलग स्थानों पर गिरे। इन्हीं स्थानों को बाद में 51 शक्तिपीठों के रूप में जाना गया।इसी वजह से दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर का धार्मिक महत्व शिव भक्तों के साथ-साथ माता सती के श्रद्धालुओं के लिए भी बेहद खास है।

आज भी मौजूद है सती आत्मदाह का पवित्र स्थल

मंदिर परिसर के पास वह स्थान भी मौजूद है, जिसे माता सती के आत्मदाह से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह जगह गहरी आस्था का केंद्र है और यहां पहुंचकर भक्त माता सती और भगवान शिव को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।

1810 में हुआ था मंदिर का निर्माण

मौजूदा मंदिर के इतिहास की बात करें तो इसका निर्माण साल 1810 में रानी धनकौर ने करवाया था। इसके बाद 1962 में मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया।आज यह मंदिर हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। सावन के पूरे महीने यहां बड़ी संख्या में शिव भक्त पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर भी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई देती है।मान्यता है कि सावन के दौरान भगवान शिव का निवास इसी पवित्र स्थान पर रहता है। यही वजह है कि हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त यहां पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।दक्ष प्रजापति महादेव मंदिर इसलिए खास है क्योंकि यह केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि भगवान शिव, माता सती और राजा दक्ष से जुड़ी उस पौराणिक कथा की याद भी दिलाता है, जिसने हिंदू धार्मिक परंपरा में 51 शक्तिपीठों की मान्यता को जन्म दिया।

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