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मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: चित्रकूट में गुप्त-गोदावरी उफनी, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात

MP Rain Havoc:

MP Rain Havoc: मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। प्रदेश के कई जिलों में बुधवार को हुई तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और कई जगह बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। सतना, उमरिया, डिंडौरी और पन्ना में बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। मौसम विभाग ने टीकमगढ़, पन्ना और नरसिंहपुर में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

MP Rain Havoc: चित्रकूट में उफनी गुप्त-गोदावरी, गुफाएं बंद-

सतना के तराई क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के बाद चित्रकूट की गुप्त-गोदावरी में पानी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। पहाड़ी से आने वाला पानी गुफाओं के ऊपर से बह रहा है। सुरक्षा को देखते हुए चित्रकूट नगर परिषद ने दोनों गुफाओं को बंद कर दिया है और पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।

MP Rain Havoc: नाले में बहा 55 वर्षीय चरवाहा-

सतना के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के भुमकहर गांव में 55 वर्षीय चरवाहा तेज बहाव वाले नाले में बह गया। घटना की सूचना मिलते ही सतना SDERF की टीम मौके पर पहुंची और उसकी तलाश शुरू कर दी। फिलहाल चरवाहे का पता नहीं चल पाया है।

उमरिया में जोहिला डैम के 3 गेट खोले-

उमरिया में संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के जोहिला डैम के तीन गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। डैम के गेट करीब 4 मीटर तक खोले गए हैं। इसके चलते आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।

डिंडौरी में 12 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूटा-

डिंडौरी में बुधवार सुबह से लगातार भारी बारिश हो रही है। बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। जिले के 12 से ज्यादा गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है।

पन्ना के कई गांवों में घुसा पानी-

पन्ना के बृजपुर क्षेत्र के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। सिमरिया के बोदा गांव में भी बारिश का पानी घरों में घुस गया। घरों में रखा खाने-पीने का सामान भी पानी से भीग गया है। स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

तीन जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट-

मौसम विभाग के मुताबिक, टीकमगढ़, पन्ना और नरसिंहपुर में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अगले 24 घंटे में इन जिलों में 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना है। 18 अगस्त को झारखंड के ऊपर सक्रिय हुए अवदाब के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, 19 अगस्त को विंध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल में भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। 20 से 24 अगस्त के बीच बारिश का असर धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश तक बढ़ने की संभावना है। अगर तेज बारिश का दौर जारी रहा तो प्रदेश में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो सकता है।

प्रदेश में अब तक 22.6 इंच बारिश-

IMD के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक 573.1 मिमी यानी करीब 22.6 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 651.4 मिमी यानी 25.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में करीब 3 इंच कम बारिश हुई है। प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से 12% कम है। पूर्वी हिस्से में 16% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 9% कम बारिश दर्ज की गई है।

40 जिलों में सामान्य से कम बारिश-

प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 19% तक कम रही है। बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी और टीकमगढ़ समेत कई जिलों में 4% से 58% तक कम बारिश हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी सामान्य से 5% से 39% तक कम बारिश हुई है।

इन 15 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश-

अनूपपुर, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन, राजगढ़ और गुना में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

जून में कम बारिश, जुलाई में पूरा हुआ कोटा-

मौसम विभाग के अनुसार, जून में प्रदेश में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश के कारण स्थिति में सुधार हुआ। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। जुलाई के आखिरी सप्ताह में फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हुआ। इससे जुलाई का बारिश कोटा तो पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। फिलहाल प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से करीब 12 से 13% कम है।

मध्य प्रदेश में सामान्य बारिश 37.3 इंच-

प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान सामान्य बारिश करीब 37.3 इंच होती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के आसपास रहती है।

भोपाल में अगस्त में 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड-

भोपाल में अगस्त महीने में सबसे ज्यादा करीब 35 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2006 में बना था। इसी साल 14 अगस्त को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश हुई थी। 2015 और 2022 में भी अगस्त के दौरान 30 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। राजधानी में अगस्त के दौरान औसतन 14 दिन बारिश होती है।

इंदौर में 1944 में हुई थी 28 इंच बारिश-

इंदौर में अगस्त महीने में सबसे ज्यादा करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1944 में दर्ज हुआ था। 22 अगस्त 2020 को 24 घंटे में करीब साढ़े 10 इंच बारिश हुई थी। पिछले 10 वर्षों में दो बार 17 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है।

ग्वालियर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड-

ग्वालियर में 24 घंटे में सबसे ज्यादा साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड 10 अगस्त 1927 को बना था। अगस्त महीने में सबसे ज्यादा 28 इंच बारिश वर्ष 1916 में हुई थी। यहां अगस्त में औसतन साढ़े 9 इंच बारिश होती है।

जबलपुर में 1923 में हुई थी 44 इंच बारिश-

जबलपुर में अगस्त महीने में सबसे ज्यादा 44 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। वर्ष 1923 में अगस्त के दौरान बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसी साल 20 अगस्त को 24 घंटे में करीब 13 इंच पानी गिरा था और बादल फटने जैसी स्थिति बन गई थी। जबलपुर में अगस्त की औसत बारिश करीब 18 इंच है और महीने में लगभग 16 दिन बारिश होती है। 2019 में भी यहां 30.61 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

उज्जैन में 2006 में सबसे ज्यादा बारिश-

उज्जैन में अगस्त महीने में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 2006 में बना था। उस साल करीब 35 इंच बारिश हुई थी। इसी वर्ष 10 अगस्त को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश दर्ज की गई थी। उज्जैन में अगस्त की औसत बारिश करीब 10 इंच है और महीने में 10 से 11 दिन बारिश होती है

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