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BCI चेयरमैन मनन मिश्रा की कुर्सी पर संकट? को-चेयरमैन ने मांगा इस्तीफा, 150 करोड़ के फंड पर उठाए सवाल

BCI Chairman News: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। BCI के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने 22 अगस्त को मनन मिश्रा को पत्र लिखकर उनके पद से इस्तीफा देने की मांग की है। छह पन्नों के पत्र में रेड्डी ने BCI के कामकाज, नियुक्तियों, फंड ट्रांसफर और BCI Trust PEARL-FIRST से जुड़े कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

रेड्डी ने मनन मिश्रा से तत्काल इस्तीफा देने और अधिकतम 15 दिनों के भीतर पद छोड़ने की मांग की है। साथ ही उन्होंने BCI और उससे जुड़े ट्रस्ट के खातों का स्वतंत्र विशेष ऑडिट कराने की मांग भी की है।

150 करोड़ रुपये के फंड पर सवाल

रेड्डी ने आरोप लगाया है कि BCI के करीब 150 करोड़ रुपये के फंड को BCI Trust PEARL-FIRST में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि एक वैधानिक नियामक संस्था का पैसा किसी ट्रस्ट में ट्रांसफर करने के लिए किस कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल किया गया। रेड्डी के मुताबिक, यह राशि देशभर के अधिवक्ताओं के योगदान से बनी BCI की निधि है। उन्होंने ट्रस्ट की संरचना और ट्रस्टी नियुक्त करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन्हें रेड्डी के पत्र में लगाए गए आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

BCI Chairman News: नियुक्तियों में पारदर्शिता का मुद्दा

BCI में कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर भी रेड्डी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि परिषद में मनन मिश्रा से व्यक्तिगत रूप से जुड़े लोगों और कथित तौर पर परिवार के सदस्यों की नियुक्तियां हुई हैं। रेड्डी का आरोप है कि इन नियुक्तियों से संबंधित भर्ती विज्ञापन, चयन समिति की कार्यवाही और तुलनात्मक मेरिट लिस्ट जैसे दस्तावेज उन्हें रिकॉर्ड में नहीं मिले। उन्होंने नियुक्तियों की प्रक्रिया और कर्मचारियों से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

लॉ कॉलेजों से कथित योगदान का आरोप

रेड्डी ने BCI से मान्यता लेने या नवीनीकरण कराने वाले लॉ कॉलेजों और संस्थानों से कथित तौर पर 25 लाख से 1 करोड़ रुपये तक ‘योगदान’ लिए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि BCI की नियामक शक्तियों का इस्तेमाल किसी ट्रस्ट के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे कथित भुगतान और योगदान की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की है।

BCI Chairman News: NALSAR विवाद भी उठा

रेड्डी ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद से जुड़े हालिया विवाद को भी इस्तीफे की मांग का आधार बनाया है। उनके अनुसार, 13 अगस्त 2026 को BCI चेयरमैन के कार्यालय से राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन को लेकर निर्देश जारी किया गया था। रेड्डी ने इस फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि संबंधित सामग्री परिषद के सामने नहीं रखी गई और कोई प्रस्ताव भी पारित नहीं हुआ। विवाद बढ़ने के बाद निर्देश वापस ले लिया गया।

15 दिन में इस्तीफे की मांग

रेड्डी ने BCI की विशेष बैठक बुलाने, खातों का स्वतंत्र ऑडिट कराने, लॉ कॉलेजों से कथित योगदान की प्रक्रिया रोकने और कर्मचारियों की नियुक्तियों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि मनन मिश्रा से उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, लेकिन BCI जैसी वैधानिक संस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। अब नजर इस बात पर है कि मनन मिश्रा इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं और BCI के भीतर इस्तीफे, विशेष बैठक तथा स्वतंत्र ऑडिट की मांग पर आगे क्या फैसला होता है।

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