Himachal School: हिमाचल प्रदेश में स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने बुधवार को निर्देश दिया कि अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों के एडमिशन फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बच्चों में जाति के आधार पर किसी तरह की हीन भावना को रोकना और समाज में समानता व भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना है। हालांकि, सरकारी योजनाओं और आरक्षण समेत अन्य लाभ प्राप्त करने के लिए जरूरत पड़ने पर अनुसूचित जाति के लोगों को अपनी जाति का विवरण देना होगा।
बच्चों में भेदभाव रोकने की पहल
मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति कल्याण बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सरकार समाज से जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्कूल से ही बच्चों के बीच समानता की भावना विकसित करना जरूरी है। सरकार के मुताबिक, एडमिशन फॉर्म से जाति का कॉलम हटाने का उद्देश्य बच्चों की पहचान को जाति के आधार पर अलग करने की प्रवृत्ति को कम करना है।
Himachal School: सरकारी योजनाओं में देना होगा जाति विवरण
स्कूल एडमिशन फॉर्म में जाति का कॉलम हटाए जाने के बावजूद सरकारी योजनाओं और निर्धारित लाभों का फायदा लेने के लिए जाति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति समुदाय के पात्र लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाए, ताकि कोई भी लाभार्थी सुविधाओं से वंचित न रहे।
स्वरोजगार और शिक्षा पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजीव गांधी स्टार्ट-अप स्वरोजगार सौर योजना के तहत 100 किलोवाट से 2 मेगावाट तक की परियोजनाएं स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। आदिवासी क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए 5 प्रतिशत और अन्य क्षेत्रों में 4 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए 20 लाख रुपये तक का ऋण सिर्फ 1 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।
Himachal School: गरीब परिवारों के लिए नई योजना
सीएम सुक्खू ने कहा कि अत्यंत गरीब परिवारों के लिए ‘अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ लागू की जाएगी। प्रस्तावित योजना के तहत पात्र परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने और परिवार की महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक पेंशन देने की बात कही गई है। सरकार का जोर सामाजिक समानता के साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सहायता देने पर भी है।








