Nepal Flood Rescue: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के 9 दिन बाद राहत और बचाव अभियान के दौरान बड़ी सफलता मिली है। त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से शुक्रवार सुबह दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। दोनों की पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के तौर पर हुई है।बाढ़ के बाद इस सुरंग में कुल 42 कर्मचारियों और मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में दो लोगों के जिंदा मिलने से बाकी लोगों की तलाश को लेकर उम्मीद बढ़ गई है।
Nepal Flood Rescue: सुरंग के अंदर सुनाई दी थी आवाज
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरंग के भीतर से इंसानी आवाज सुनाई देने की जानकारी मिली थी। इसके बाद नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें सुरंग के अंदर पहुंचीं और तलाशी अभियान को तेज कर दिया गया।नेपाल में आई बाढ़ से अब तक 5,300 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा में 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, राहत और बचाव टीमों ने अब तक 12,038 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में शवों की तलाश और उन्हें बरामद करने का काम लगातार जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद किए गए हैं। अब तक मिले शवों में से 95 लोगों की पहचान हो चुकी है।प्रशासन और बचाव दल एक तरफ लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बरामद शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी चल रही है।
प्रभावित लोगों के लिए सरकार ने घोषित किया राहत पैकेज
नेपाल सरकार ने बाढ़ से प्रभावित कारोबारियों और लोगों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की है। बाढ़ में नष्ट हुए वाहनों, मशीनों और दूसरे उपकरणों को बिना कस्टम ड्यूटी के दोबारा आयात करने की अनुमति दी जाएगी।वहीं, प्रभावित लोगों के लोन की किस्तों को आगे बढ़ाने या उनकी भुगतान शर्तों को नए सिरे से तय करने का प्रावधान किया गया है।बीमा कंपनियों को भी बीमा दावों का जल्द निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं। शुरुआती नुकसान के आकलन के आधार पर कंपनियां 50 प्रतिशत तक की रकम एडवांस के रूप में दे सकेंगी।
Nepal Flood Rescue: 15 बस्तियां हुईं तबाह
बाढ़ के कारण रसुवा, नुवाकोट और धादिंग की करीब 15 बस्तियां पूरी तरह तबाह हो गई हैं। इसे देखते हुए सरकार बाढ़ के खतरे वाले क्षेत्रों से लोगों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर बसाने की तैयारी कर रही है।शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ से करीब 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं और 8,317 घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं। वहीं, रेस्क्यू किए गए करीब 3,948 लोग अस्थायी राहत केंद्रों में रह रहे हैं।सरकार ने रेस्क्यू अभियान में शामिल कर्मचारियों के लिए जोखिम भत्ते का भी प्रावधान किया है। ड्यूटी के दौरान किसी रेस्क्यू कर्मी की मौत होने पर उसके परिवार को 10 लाख नेपाली रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से रेस्क्यू टीम एक व्यक्ति को बाहर लाती हुई दिखाई दी। नेपाली सेना ने इस पूरे रेस्क्यू अभियान का वीडियो भी जारी किया है।
रसुवा और नुवाकोट में 600 बच्चे लापता
नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में फ्लैश फ्लड के बाद करीब 600 बच्चे अब भी लापता हैं। जानकारी के मुताबिक, रसुवा में लगभग 280 बच्चे, जबकि नुवाकोट में 300 से 350 बच्चे लापता बताए गए हैं।अकेले नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका में करीब 250 बच्चों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।प्रशासन और स्कूलों से बच्चों से जुड़े आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। हालांकि, बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था प्रभावित होने से सही संख्या पता करने में परेशानी हो रही है।कुछ बच्चों का पता लगाया जा चुका है, लेकिन अलग-अलग स्कूलों से नए लापता बच्चों की जानकारी भी लगातार सामने आ रही है। इसके अलावा बाढ़ के दौरान दोनों जिलों के 22 शिक्षक और स्कूल कर्मचारी भी लापता हुए हैं।

Nepal Flood Rescue: नेपाल ने भारत से मुआवजा मांगने से किया इनकार
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने स्पष्ट किया है कि नेपाल ने भारत, चीन या अमेरिका से जलवायु मुआवजे की मांग नहीं की है। उन्होंने कहा कि नेपाल की अपील केवल इतनी है कि दुनिया रसुवा में आई आपदा को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के नजरिए से देखे। साथ ही, हिमालयी देशों की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाया जाए।खनाल ने बाढ़ के बाद भारत की ओर से तुरंत उपलब्ध कराई गई राहत और बचाव सहायता के लिए आभार भी जताया।
एनवीडिया ने बाढ़ राहत के लिए दिए 10 मिलियन डॉलर
अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद राहत और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए 10 मिलियन डॉलर यानी 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आर्थिक मदद दी है। यह रकम करीब 1.5 अरब नेपाली रुपए के बराबर है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग को इस सहायता के लिए धन्यवाद दिया। वागले के अनुसार, इस मदद के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में जमा राशि 10 अरब नेपाली रुपए से अधिक हो गई है।
UN महासभा में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाएंगे नेपाल PM
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जलवायु परिवर्तन और इसके कारण पर्वतीय क्षेत्रों पर पड़ रहे प्रभाव का मुद्दा उठा सकते हैं।रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शाह ने महासभा में शामिल होने की इच्छा जताई है। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने उनके न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियां शुरू कर दी हैं।इससे पहले शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। बाद में कैबिनेट ने विदेश मंत्री शिशिर खनाल की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया था।
भारत की नई राहत खेप में फोरेंसिक किट और मेडिकल सामान
भारत के छठे और सातवें राहत विमान गुरुवार रात काठमांडू पहुंचे। दोनों C-130J विमानों के जरिए कुल 21.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई गई। इसमें फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण भी शामिल हैं।भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई।नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि यह सहायता रसुवा फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत एवं बचाव प्रयासों में भारत के लगातार जारी सहयोग का हिस्सा है।

Nepal Flood Rescue: 26 अगस्त से भारत भेज रहा राहत सामग्री
भारत ने नेपाल में बाढ़ के बाद 26 अगस्त को पहला राहत विमान भेजा था। इस विमान के जरिए 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी। इसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं।इसके बाद 27 अगस्त को 37.5 टन राहत सामग्री भेजी गई। तीसरे विमान के जरिए 10 टन और 30 अगस्त को चौथे विमान से 11 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई गई।चौथी खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरणों के साथ DNA विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी भेजी गई थी।इसके बाद 2 सितंबर को भारत ने पांचवां राहत विमान भेजा। इसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां शामिल थीं।
बाढ़ की वजहों का पता लगा रहे विशेषज्ञ
भोटेकोशी में आई इस बड़ी आपदा के कारणों को समझने के लिए नेपाल में जलवायु वैज्ञानिक, पर्वतीय विशेषज्ञ और हिमनद विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं।विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अचानक आई बाढ़ के पीछे कौन से प्राकृतिक और जलवायु संबंधी कारण जिम्मेदार हैं।इसी बीच नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के वितरण के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है। इसके अलावा राहत और बचाव कार्यों के लिए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में सीधे आर्थिक सहायता जमा करने की व्यवस्था भी की गई है।
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