Ajit Bharti: यूट्यूबर और टिप्पणीकार अजीत भारती के खिलाफ दिल्ली में दर्ज SC/ST एक्ट के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 सितंबर 2026 को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने प्रथम दृष्टया SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध के तत्व पाए और एक्ट की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत पर रोक को लागू माना। हालांकि, यह आदेश मामले में भारती को दोषी ठहराने वाला फैसला नहीं है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
पूरा मामला अजीत भारती के सोशल मीडिया पर प्रकाशित एक वीडियो से जुड़ा है। वीडियो का शीर्षक Reservation Hatao Andolan बताया गया है। यह मामला उस समय सामने आया जब भारती आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के सिलसिले में चर्चा में थे। शिकायतकर्ता बालकराम बौद्ध, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष हैं। उन्होंने वीडियो को लेकर पुलिस में शिकायत दी।
Ajit Bharti: शिकायत में अजीत भारती पर क्या आरोप लगाए गए?
शिकायत में आरोप लगाया गया कि वीडियो में जाति आधारित और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया तथा आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद और डॉ. बीआर आंबेडकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। शिकायत में महिलाओं के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक भाषा और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर SC/ST एक्ट के साथ आईटी एक्ट की धारा 67 तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 196(1)(c) और 351(3) भी लगाईं।
23 अगस्त को FIR, फिर कोर्ट क्यों पहुंचे भारती?
दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू जाने में 23 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की गई। इसके बाद गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अजीत भारती ने पटियाला हाउस कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया। 25 अगस्त को अदालत में पहली सुनवाई हुई। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस दिया और जांच अधिकारी को भी तलब किया। उस समय अदालत ने कहा था कि अगर पुलिस BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करती है तो उसकी प्रति अदालत के रिकॉर्ड पर रखी जाए, ताकि कोर्ट यह देख सके कि SC/ST एक्ट के अपराध के प्रथम दृष्टया आवश्यक तत्व मौजूद हैं या नहीं।
Ajit Bharti: अजीत भारती की तरफ से क्या दलील दी गई?
भारती की ओर से वकील जय अनंत देहाद्राई ने दलील दी कि उन्होंने किसी जाति या समुदाय के खिलाफ जातिसूचक गाली नहीं दी। बचाव पक्ष के मुताबिक उनकी टिप्पणी एक कथित “गंभीर उकसावे” के जवाब में थी। दावा किया गया कि किसी व्यक्ति ने भारती की बहन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और इसी के जवाब में उनकी प्रतिक्रिया आई। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि वीडियो और संबंधित सामग्री पहले से सार्वजनिक है, इसलिए उसकी जांच के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी नहीं है।
कोर्ट ने अग्रिम जमानत क्यों खारिज की?
7 सितंबर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसपीएस लालेर ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की धारा 3(1)(r) के अपराध के तत्व प्रथम दृष्टया सामने आते हैं। इसके चलते एक्ट की धारा 18 में मौजूद अग्रिम जमानत संबंधी रोक लागू होती है। इसलिए अदालत ने भारती को गिरफ्तारी से पहले मिलने वाली सुरक्षा देने से इनकार कर दिया।
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