UJJAIN HANUMAN MANDIR: क्या कोई करीब 8 फीट ऊंची प्रतिमा इतनी मजबूत नींव पर हो सकती है कि भारी क्रेन और जेसीबी भी उसे हिला न पाएं? मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर पिछले चार दिनों से यही सवाल चर्चा में है। नगर निगम की कई कोशिशों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। अब प्रशासन ने ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के अधिकारियों की मदद लेने का फैसला किया है, ताकि पता लगाया जा सके कि प्रतिमा जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और इसे सुरक्षित तरीके से हटाना संभव है या नहीं।
आखिर प्रतिमा को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?
उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत कंठाल-छत्री रोड के चौड़ीकरण की योजना है। सड़क के रास्ते में खड़े हनुमान जी का मंदिर आ रहा है। इसी वजह से मंदिर को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना बनाई गई। 4 और 5 सितंबर को नगर निगम की टीम ने मंदिर की छत और दीवारों को हटा दिया। इसके बाद जब प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश शुरू हुई तो मामला मुश्किल हो गया। चार दिनों में कई बार मशीनों से प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा को खिसकाया नहीं जा सका।
UJJAIN HANUMAN MANDIR: मशीनें भी क्यों नहीं हिला पाईं प्रतिमा?
प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिमा जमीन के अंदर कितनी गहराई तक जुड़ी हुई है। बताया जा रहा है कि अब तक करीब डेढ़ फीट तक खुदाई की गई है, लेकिन इससे प्रतिमा के आधार की पूरी संरचना स्पष्ट नहीं हो सकी। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि प्रतिमा किसी बड़े बेसाल्ट पत्थर को तराशकर बनाई गई हो, जिसका बड़ा हिस्सा जमीन के अंदर हो सकता है। यही वजह है कि अब बिना वैज्ञानिक जांच के इसे खींचकर हटाने का जोखिम नहीं लिया जा रहा।
ASI अब क्या पता करेगी?
यहीं से पूरे मामले में ASI की भूमिका अहम हो जाती है। पुरातत्व विशेषज्ञ वैज्ञानिक तकनीक के जरिए यह समझने की कोशिश करेंगे कि प्रतिमा के नीचे क्या संरचना मौजूद है।इसके लिए ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें जमीन के भीतर रेडियो तरंगें भेजकर नीचे मौजूद संरचनाओं का आकलन किया जाता है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि प्रतिमा का आधार कितना गहरा है और उसके नीचे कोई पुरानी संरचना या अवशेष मौजूद हैं या नहीं। इसके साथ 3D लेजर स्कैनिंग जैसी तकनीक से प्रतिमा और उसके बेस की संरचना का डिजिटल आकलन किया जा सकता है।
UJJAIN HANUMAN MANDIR: क्या 1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा?
प्रतिमा की उम्र को लेकर अभी अलग-अलग संभावनाएं सामने आ रही हैं। एक अनुमान इसे करीब 170 साल पुराना बताता है, जबकि कुछ लोगों द्वारा इसे परमार वंश या राजा भोज के काल से जोड़ने की संभावना जताई जा रही है। अगर पुरातात्विक जांच में इसका संबंध किसी प्राचीन काल से सामने आता है तो मामला सिर्फ मंदिर शिफ्टिंग का नहीं रहेगा, बल्कि ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण का भी बन सकता है। हालांकि प्रतिमा के राजा भोज के समय की होने या करीब एक हजार साल पुरानी होने की बात अभी पुष्ट तथ्य नहीं है। इसकी पुष्टि वैज्ञानिक और पुरातात्विक जांच के बाद ही हो सकेगी।

क्या अब बिना ASI की अनुमति प्रतिमा नहीं हटेगी?
प्रशासन के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात प्रतिमा की सुरक्षा है। ASI की जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि- प्रतिमा की वास्तविक उम्र कितनी है? इसका संबंध किस काल या राजवंश से है? जमीन के नीचे इसका आधार कितना गहरा है? आसपास कोई पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं या नहीं? प्रतिमा को हटाना सुरक्षित और तकनीकी रूप से संभव है या नहीं? अगर हटाना संभव है तो इसे किस तरीके से शिफ्ट किया जाए? अगर प्रतिमा ऐतिहासिक महत्व की पाई जाती है तो वैकल्पिक रास्ते या सड़क की योजना में बदलाव जैसे विकल्प भी सामने आ सकते हैं।
UJJAIN HANUMAN MANDIR: चमत्कार या मजबूत नींव? अब खुलेगा राज
चार दिनों से प्रतिमा का अपनी जगह से नहीं हिलना लोगों के बीच आस्था और कौतूहल का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे हनुमान जी की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब इसका जवाब वैज्ञानिक जांच से तलाश रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है- प्रतिमा के नीचे आखिर कितना बड़ा आधार मौजूद है? ASI की जांच से इसका जवाब मिलने के बाद ही तय होगा कि खड़े हनुमान जी को शिफ्ट किया जाएगा या फिर सड़क चौड़ीकरण की योजना में बदलाव करना पड़ेगा।
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