New Delhi: सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार की नींद टूटी है। सरकार ने PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से ध्यान देना शुरू किया है।एमसीडी ने PG का सुरक्षा सर्वे शुरू किया है।सरकार ने अवैध रूप से बनी पांच मंजिला या खतरनाक इमारतों की पहचान कर उन्हें तत्काल सील करने का भी निर्णय लिया है।यह काम कितनी पारदर्शिता से होगा, इस बारे में फिलहाल कुछ कह पाना बड़ा मुश्किल है, क्योंकि अतीत में भी हादसों के वक्त सुरक्षा उपायों पर ध्यान देने की बातें हुई, लेकिन इसके बावजूद हादसे होते रहे।
समझ से परे है मुख्यमंत्री की अपील
खास बात यह है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सांसदों, विधायकों और पार्षदों से अपने क्षेत्रों में निर्माणाधीन अवैध इमारतों की जानकारी संबंधित विभाग को देने की अपील की है।मुख्यमंत्री की यह अपील समझ से परे है।सच कहें तो उनकी यह अपील उस बेसुरे राग की भांति है, जिसे कोई सुनना पसंद नहीं करेगा या जिसका जनता में कोई असर नहीं होने वाला। जनता क्यों मुख्यमंत्री को गंभीरता से लेगी? क्या सत्य निकेतन के जिस इलाके में इमारत गिरी, वहां के पार्षदों ने इस बारे में पहले संबंधित विभाग को कोई सूचना दी थी, यदि दी थी तो कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अब कैंसे मान लें कि विधायक या पार्षद मुख्यमंत्री की अपील को गंभीरता से लेंगे?
New Delhi: ठोस निर्णय लेने का साहस दिखा पाएंगी सीएम?
हाँ, मुख्यमंत्री अपील करने के बजाए यह आदेश दें कि दिल्ली में सबसे पहले उन अवैध इमारतों को चिन्हित कर सील कर दिया जाए जो विधायकों, पार्षदों या उनके रिश्तेदारों की हैं, तो वाकई उनकी बात में दम है।जनता उनके इस आदेश का तहे दिल स्वागत करेगी।राजनीति में कभी-कभी ठोस फैसले लेने पड़ते हैं।एक समय हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान हड़ताली सरकारी कर्मचारियों को दो टूक कहा कि यदि वे बिना काम के हड़ताल पर रहते हैं, तो उन्हें उस अवधि का वेतन नहीं मिलेगा।शांता कुमार ‘नो वर्क, नो पे’ के अपने सिद्धांत पर अडिग रहे। इसके बाद वे बेशक चुनाव हार गए, लेकिन राजनीति में उनके ठोस निर्णय को आज तक याद किया जाता है।क्या रेखा गुप्ता कोई ऐसा ठोस निर्णय लेने का साहस दिखा पाएंगी?
New Delhi: क्या ये लोग अपने अवैध मकान गिरा सकते हैं?
हो सकता है कि दिल्ली में किसी भी विधायक, पार्षद या सांसद के नाम अवैध इमारतें नहीं होंगी, लेकिन उनमें से किसी के रिश्तेदारों या सगे-संबंधियों के नाम पर तो हो ही सकती हैं। क्या रेखा गुप्ता ऐसी इमारतों की पहचान और उन्हें सील करने का आदेश नहीं दे सकती हैं? यदि मुख्यमंत्री ऐसा आदेश नहीं दे सकती हैं, तो कम से कम यह अपील तो कर ही सकती हैं कि वे खुद ही अपनी-अपनी अवैध इमारतों अथवा पीजी हॉस्टलों को गिराकर आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करें। जनता में संदेश दें कि जैसे हमने अपने अवैध निर्माण गिराकर नियमों का पालन किया है, वैसे ही वे भी करें।आखिर राजनीति समाज को दिशा देने का काम करती है।हो सकता है कि दिल्ली में किसी भी विधायक या पार्षद द्वारा व्यक्तिगत रूप से अवैध मकान नहीं बनाए गए होंगे, लेकिन जनता में इस बात की बराबर चर्चा रहती है नियमों की अनदेखी करके बहुमंजिला या पांच मंजिला मकान बनाने के मामलों में स्थानीय स्तर पर विधायकों, पार्षदों और अधिकारियों की मिलीभगत होती है। सोचने की बात है कि आखिर इस तरह की चर्चाओं पर कैसे विराम लग सकेगा?








