Awadh Ojha’s Statement: आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और शिक्षक अवध ओझा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें वह सत्ता और देश की मौजूदा स्थिति को लेकर अपनी बात रखते हुए कहते नजर आ रहे हैं कि वह भगवान से रोज प्रार्थना करते हैं कि उन्हें कभी सत्ता में न बैठाया जाए। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा कि अगर गलती से भगवान ने उन्हें देश की गद्दी पर बैठा दिया तो “30-40 करोड़ लोगों को ऐसे ही निपटा दूंगा।” ओझा ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह देश में बदतमीजी बर्दाश्त नहीं करेंगे। हालांकि, उनके बयान का पूरा संदर्भ और आशय उनके वीडियो के संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए।
आखिर किस मुद्दे पर अवध ओझा ने दिया बयान?
अवध ओझा ने यह टिप्पणी कथित तौर पर अभिनेत्री स्वरा भास्कर के जौहर से जुड़े बयान पर चर्चा के दौरान की। उन्होंने इतिहास पढ़ने और विवादित टिप्पणियों से बचने की बात कही। इसके बाद उन्होंने हिंदू-मुस्लिम के आधार पर समाज में टकराव की सोच पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि देश को धार्मिक आधार पर बांटने वाली सोच स्वतंत्रता सेनानियों को भी दुखी करती। इसी दौरान उन्होंने सत्ता को लेकर अपनी बात रखी।
Awadh Ojha’s Statement: ‘भगवान मुझे सत्ता में मत लाना’ क्यों बोले?
ओझा ने कहा कि वह रोज सुबह-शाम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें सत्ता में न लाया जाए। उन्होंने आज के भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वह सत्ता में आ गए तो बदतमीजी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनके बयान का सबसे विवादित हिस्सा वह रहा, जिसमें उन्होंने सत्ता मिलने की स्थिति में 30-40 करोड़ लोगों को ‘निपटा देने’ की बात कही। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर बहस का विषय बन गई है।

हिंदू-मुस्लिम को लेकर क्या बोले अवध ओझा?
अवध ओझा ने अपने बयान में धार्मिक पहचान को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हिंदू है तो ऐसा हिंदू बने जिस पर गर्व हो और मुसलमान है तो ऐसा मुसलमान बने जिसकी लोग तारीफ करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए स्वामी रामकृष्ण परमहंस, रामानंद और रहीम जैसी शख्सियतों का उल्लेख किया। उनका जोर इस बात पर था कि धार्मिक पहचान से ज्यादा महत्वपूर्ण व्यक्ति का आचरण और उसका काम होना चाहिए।
Awadh Ojha’s Statement: अवध ओझा का राजनीतिक सफर क्या रहा है?
अवध ओझा ने 2025 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पटपड़गंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव था, लेकिन उन्हें बीजेपी उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूरी बनाई और बाद में आम आदमी पार्टी से अलग होने का ऐलान किया। हालांकि, इसके बाद भी उनके बयानों में राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है।
बयान पर क्यों मचा विवाद?
एक तरफ ओझा ने धार्मिक आधार पर समाज में टकराव की सोच की आलोचना की और हिंदू-मुस्लिम समुदायों से बेहतर आचरण की अपील की। वहीं दूसरी तरफ 30-40 करोड़ लोगों को ‘निपटा देने’ वाली टिप्पणी ने उनके बयान को विवादों में ला दिया।
Awadh Ojha’s Statement: क्या है पूरे बयान का संदेश?
अवध ओझा के बयान में एक ओर धार्मिक सौहार्द और बेहतर नागरिक आचरण की बात है, तो दूसरी ओर सत्ता मिलने की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों को ‘निपटा देने’ जैसी टिप्पणी बेहद तीखी है। ऐसे बयानों को लेकर यह सवाल भी उठता है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को अपनी बात रखते समय शब्दों के चयन में कितनी सावधानी बरतनी चाहिए।








