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1.1 अरब की मंदारिन से 60 करोड़ की हिंदी तक, BRICS में लगेगा भाषाओं का महाकुंभ

BRICS Summit 2026:

BRICS Summit 2026: 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारत मंडपम में होने वाली इस बैठक में राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ अलग-अलग भाषाओं का भी अनोखा संगम देखने को मिलेगा। सम्मेलन में मंदारिन, हिंदी, रूसी, अरबी, पुर्तगाली, फारसी, इंडोनेशियाई, मलय और थाई समेत कई भाषाएं सुनाई देंगी।

BRICS Summit 2026: दिल्ली में सुनाई देंगी दुनिया की प्रमुख भाषाएं-

18वें BRICS Summit में सदस्य देशों के साथ पार्टनर देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। ऐसे में भारत मंडपम में हिंदी, अंग्रेज़ी, मंदारिन, रूसी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी, इंडोनेशियाई, मलय और थाई भाषाओं का इस्तेमाल देखने को मिल सकता है। इन भाषाओं को बोलने वालों की संख्या दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से तक पहुंचती है। यानी दिल्ली में सिर्फ अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि अरबों लोगों का भाषाई प्रतिनिधित्व भी नजर आएगा।

BRICS Summit 2026: BRICS का दायरा बढ़ने से बढ़ा भाषाओं का संगम-

BRICS अब केवल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका तक सीमित नहीं है। संगठन में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, इंडोनेशिया और अन्य देशों के शामिल होने से इसका दायरा काफी बढ़ गया है। ऐसे में दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में रूसी, हिंदी, अंग्रेज़ी, मंदारिन, पुर्तगाली, मलय, थाई, फारसी और अरबी जैसी भाषाएं सुनाई देंगी। अलग-अलग भाषाओं वाले देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी सम्मेलन को भाषाई तौर पर भी खास बनाएगी।

मंदारिन: सबसे ज्यादा लोगों की मातृभाषा-

अगर केवल मातृभाषा बोलने वालों की संख्या की बात करें तो मंदारिन दुनिया की सबसे बड़ी भाषाओं में शामिल है। चीन के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत और आधिकारिक दस्तावेजों में मंदारिन का व्यापक इस्तेमाल होता है। BRICS Summit के दौरान भी चीन की ओर से आधिकारिक बातचीत में मंदारिन का इस्तेमाल प्रमुख रूप से किया जा सकता है। बड़ी संख्या में लोगों द्वारा बोली जाने के कारण यह सम्मेलन की प्रमुख भाषाओं में से एक होगी।

अलग-अलग भाषा वाले नेता एक-दूसरे को कैसे समझेंगे-

अब सवाल यह है कि जब सम्मेलन में अलग-अलग देशों के नेता अपनी-अपनी भाषाओं में बात करेंगे, तो वे एक-दूसरे की बात कैसे समझेंगे? ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में दुभाषिए और इंटरप्रिटेशन सिस्टम अहम भूमिका निभाते हैं। नेताओं के भाषण और बातचीत को दूसरी भाषा में तत्काल अनुवाद किया जाता है। इससे अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले प्रतिनिधि बिना किसी बड़ी भाषाई बाधा के चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं।

BRICS Summit बनेगा भाषाओं के संगम का मंच-

BRICS Summit 2026 भारत के लिए केवल कूटनीतिक और रणनीतिक लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं होगा। दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन अलग-अलग देशों की भाषाओं और संस्कृतियों को एक मंच पर लाने का भी अवसर बनेगा। मंदारिन से लेकर हिंदी, रूसी, अरबी और पुर्तगाली तक, भारत मंडपम में दुनिया की कई प्रमुख भाषाओं की गूंज सुनाई देगी। यही विविधता BRICS को केवल राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि वैश्विक भाषाई और सांस्कृतिक संगम भी बनाएगी

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