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EXPLAINER: कौन हैं रोहिणी घावरी? चंद्रशेखर आजाद से विवाद, भारत वापसी, सवर्ण समर्थन और यूपी चुनाव में संभावित भूमिका

Rohini Ghavri: भारत लौटीं रोहिणी घावरी, चंद्रशेखर पर एक्शन की तैयारी

Rohini Ghavri: स्विट्जरलैंड में उच्च शिक्षा हासिल करने वाली डॉ. रोहिणी घावरी एक बार फिर चर्चा में हैं। चंद्रशेखर आजाद पर गंभीर आरोप लगाने के बाद अब उनकी भारत वापसी ने इस विवाद को नया राजनीतिक रंग दे दिया है। रोहिणी ने दिल्ली पहुंचने के बाद भी चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही है। ऐसे में सवाल है कि आखिर रोहिणी घावरी कौन हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका क्या हो सकती है?

कौन हैं रोहिणी घावरी?

रोहिणी घावरी मूल रूप से इंदौर की रहने वाली हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और 2019 में आगे की पढ़ाई के लिए स्विट्जरलैंड गई थीं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह वहां पीएचडी से जुड़ी रहीं और सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय रही हैं। रोहिणी खुद को दलित और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर मुखर बताती रही हैं। चंद्रशेखर आजाद के संपर्क में आने के बाद उन्होंने उनके साथ सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में काम करने का भी दावा किया था।

Rohini Ghavri: चंद्रशेखर आजाद से क्या है विवाद?

रोहिणी घावरी और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के बीच विवाद निजी रिश्ते से जुड़ा बताया जाता है। रोहिणी ने आरोप लगाया है कि रिश्ते के दौरान उन्हें चंद्रशेखर की वैवाहिक स्थिति की जानकारी बाद में हुई और इसके बाद विवाद बढ़ा। उन्होंने चंद्रशेखर पर शोषण, धमकी और निजी तस्वीरों-वीडियो के जरिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। 2025 में उन्होंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय महिला आयोग और दिल्ली पुलिस तक शिकायत पहुंचाने की बात कही थी।

इन आरोपों को रोहिणी का पक्ष बताते हुए देखना जरूरी है। चंद्रशेखर आजाद ने इस मामले को व्यक्तिगत बताते हुए कहा था कि वह अपनी बात अदालत में रखेंगे। यानी दोनों पक्षों के दावों को न्यायिक निष्कर्ष के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

स्विट्जरलैंड से भारत वापसी क्यों अहम?

अब रोहिणी स्विट्जरलैंड से भारत लौट आई हैं। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ अपनी लड़ाई का अगला चरण शुरू करने की बात कही और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई। इससे संकेत मिलता है कि यह मामला केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहने के बजाय आगे कानूनी या सार्वजनिक अभियान का रूप ले सकता है।

Rohini Ghavri: सवर्ण समाज के समर्थन का कितना असर?

रोहिणी के हालिया बयानों और सोशल मीडिया गतिविधियों में सवर्ण समाज के समर्थन की चर्चा भी सामने आई है। कुछ पोस्ट और वीडियो में उनके सवर्ण समाज के समर्थन की बात कही गई है। हालांकि, इसे पूरे सवर्ण समाज का संगठित समर्थन या किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक समर्थन कहना अभी जल्दबाजी होगी। इसी तरह उनकी सुरक्षा को लेकर भी बयान सामने आए हैं, लेकिन किसी औपचारिक सरकारी सुरक्षा व्यवस्था की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है।

यूपी चुनाव में क्या हो सकती है भूमिका?

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है और ऐसे में रोहिणी की सक्रियता को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। फिलहाल उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने या चुनाव लड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए BJP, कांग्रेस, सपा या किसी अन्य दल के साथ जाने की चर्चा अभी संभावनाओं तक सीमित है।

हालांकि, अगर रोहिणी भविष्य में सक्रिय राजनीति में उतरती हैं तो इसका सबसे सीधा राजनीतिक असर चंद्रशेखर आजाद और उनकी आजाद समाज पार्टी की राजनीति पर चर्चा के रूप में पड़ सकता है। 2024 लोकसभा चुनाव में चंद्रशेखर आजाद ने नगीना सीट 1,51,473 वोटों के बड़े अंतर से जीती थी। ऐसे में रोहिणी की सक्रियता को उनके राजनीतिक प्रभाव के संदर्भ में देखना स्वाभाविक है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे उनके चुनावी आधार पर वास्तविक असर पड़ेगा।

 

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