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ईरान-अमेरिका युद्ध पर ट्रंप का बड़ा बयान, तेल की कीमतों पर भी असर

Iran-US War

Iran-US War: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। हालिया हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हालांकि हमलों की तीव्रता पहले की तुलना में कम बताई जा रही है, लेकिन हालात अब भी गंभीर हैं। इसी बीच ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि युद्ध खत्म होने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आएगी।

ट्रंप ने कहा- जल्द खत्म होगा युद्ध

आयरलैंड की राजधानी डबलिन में आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युद्ध जल्द समाप्त होगा और इसके बाद वैश्विक तेल बाजार में कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी। हालांकि, दोनों देशों के बीच फिलहाल शांति समझौते के स्पष्ट संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं।

Iran-US War: स्ट्रेट से गुजरता है 20% वैश्विक तेल

ईरान-अमेरिका संघर्ष का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। ईरान एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है और होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति इस रास्ते से गुजरती है। संघर्ष के कारण सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ी, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।

IRGC ने समुद्री इलाके में लगाए प्रतिबंध

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास समुद्री क्षेत्र में नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। बताया गया है कि प्रतिबंधित क्षेत्र चाबहार से लेकर ओमान की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों तक फैला होगा। IRGC ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई की जा सकती है।

Iran-US War: जहाजों पर कार्रवाई हुई तो बढ़ सकता है तेल का संकट

IRGC के इस फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यदि प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होती है, तो तेल की आपूर्ति और प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।

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