BRICS Education Agenda: नई दिल्ली घोषणा में इन क्षेत्रों से जुड़े कई प्रस्तावों और सहयोग की बात की गई है। आने वाले वर्षों में इसका असर छात्रों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और युवाओं तक पहुंच सकता है। आखिर दो दिनों में क्या हुआ और भारत को इससे क्या हासिल हुआ, जानिए खबर इंडिया के इस खास एक्सप्लेनर में।
BRICS Education Agenda: भारत की BRICS अध्यक्षता का फोकस क्या रहा-
भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता का जोर Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability पर रहा। सालभर में अलग-अलग क्षेत्रों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम 25 शहरों में आयोजित किए गए। शिक्षा, विज्ञान, उद्योग, श्रम और तकनीक से जुड़े मंत्रीस्तरीय संवादों के बाद अब इनका एक हिस्सा नई दिल्ली घोषणा में दिखाई देता है।
BRICS Education Agenda: दो दिनों में क्या हुआ-
12 सितंबर को BRICS नेताओं की बैठक और विभिन्न सत्रों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक, AI, आतंकवाद, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसी दौरान नई दिल्ली घोषणा को अपनाया गया। घोषणा में AI के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल से लेकर विज्ञान एवं शोध सहयोग, शिक्षा और कौशल विकास तक कई क्षेत्रों को शामिल किया गया। 13 सितंबर को नेताओं के बीच व्यापक चर्चा हुई और भारत ने BRICS की अध्यक्षता चीन को सौंप दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS को केवल सरकारों का मंच न बनाना युवाओं, उद्यमियों, शोधकर्ताओं और समाज के दूसरे वर्गों को जोड़ने पर जोर दिया। मौजूदा BRICS में 11 देश हैं और यह समूह दुनिया की करीब आधी आबादी तथा लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करता है।
शिक्षा के मोर्चे पर क्या बदलेगा-
नई दिल्ली घोषणा के शिक्षा वाले हिस्से में सिर्फ छात्रवृत्ति या छात्र आदान-प्रदान की बात नहीं है। शिक्षा को सीधे रिसर्च, तकनीक, कौशल, उद्योग और रोजगार से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है। घोषणा में BRICS देशों के बीच शिक्षा में श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को साझा करने, योग्यताओं की आपसी मान्यता, छात्रों और शिक्षकों की अकादमिक एवं पेशेवर आवाजाही, डिजिटल साक्षरता और संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।
यूनिवर्सिटी रैंकिंग का नया विचार-
BRICS देशों ने BRICS University Global Ranking and Evaluation System विकसित करने की संभावना तलाशने की बात कही है। साथ ही BRICS Rectors’ Forum को जारी रखने का समर्थन किया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा वैश्विक रैंकिंग खत्म हो जाएंगी। बल्कि BRICS देश अपने विश्वविद्यालयों को एक साझा ढांचे में देखने और उनकी गुणवत्ता का अलग तरीके से मूल्यांकन करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। भारत के लिए इसका महत्व इसलिए है क्योंकि IIT, IISc, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और दूसरे उच्च शिक्षा संस्थानों को BRICS देशों के बड़े अकादमिक नेटवर्क से जोड़ने का अवसर मिल सकता है।
BRICS Education Olympiad पर चर्चा-
घोषणा में BRICS Education Olympiad आयोजित करने पर चर्चा जारी रखने की बात कही गई है। यह अभी किसी स्थापित प्रतियोगिता की तरह नहीं है, बल्कि सदस्य देशों के बीच इस दिशा में आगे बढ़ने का प्रस्ताव है। अगर इसे व्यावहारिक रूप दिया जाता है तो छात्रों को अलग-अलग BRICS देशों के विद्यार्थियों के साथ शैक्षणिक प्रतियोगिता, ज्ञान और नवाचार साझा करने का मंच मिल सकता है।
AI अब शिक्षा से अलग नहीं-
घोषणा में शिक्षा में उभरती तकनीकों, खासकर Artificial Intelligence, के सुरक्षित, नैतिक और मानव-केंद्रित इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि BRICS देश AI को केवल उद्योग और तकनीकी क्षेत्र की चीज मानने के बजाय पढ़ाई, शोध और सीखने की प्रक्रिया में भी इस्तेमाल करने पर सहयोग बढ़ाएंगे। डिजिटल साक्षरता और AI के सुरक्षित इस्तेमाल की जरूरत को भी स्वीकार किया गया है। भारत के लिए यह विषय पहले से महत्वपूर्ण है। फरवरी 2026 में भारत में हुए AI Impact Summit में भी AI को व्यापक पहुंच, मानव पूंजी, विज्ञान और सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया था।
STEM और रिसर्च पर जोर क्यों महत्वपूर्ण है-
BRICS घोषणा में Undergraduate और Postgraduate स्तर पर Science, Technology, Engineering and Mathematics यानी STEM विषयों में छात्र विनिमय और छात्रवृत्ति कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसके साथ BRICS Network University को मजबूत करने और संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। विज्ञान के क्षेत्र में BRICS Science and Research Repository की दिशा में भी आगे बढ़ने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच वैज्ञानिक ज्ञान और शोध से संबंधित सामग्री साझा करने के लिए एक संरचित मंच तैयार करना है। घोषणा में संयुक्त वैज्ञानिक शोध के लिए BRICS STI Framework Programme का भी उल्लेख किया गया है। इसका फायदा भारत को यह हो सकता है कि भारतीय शोधकर्ताओं को दूसरे BRICS देशों की प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक नेटवर्क और शोधकर्ताओं के साथ सहयोग के ज्यादा अवसर मिलें।
स्टार्टअप को मिलेगी सीमा पार पहुंच-
BRICS का शिक्षा और रिसर्च एजेंडा अब स्टार्टअप से भी जुड़ रहा है। नई दिल्ली घोषणा में BRICS Incubator Network की स्थापना का स्वागत किया गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के राष्ट्रीय संस्थानों, इन्क्यूबेटरों और स्टार्टअप को आपस में जोड़ना है। साथ ही BRICS Startup Innovation Fund पर आगे विचार करने की बात कही गई है। इसका लक्ष्य शुरुआती और विकास के चरण वाले स्टार्टअप को वित्तीय सहयोग देना और नवाचार आधारित कारोबार को बढ़ावा देना है। भारत ने BRICS अध्यक्षता के दौरान इस दिशा में पहले ही पहल की थी। 11-12 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित BRICS India Innovates Exhibition में 37 डीप-टेक स्टार्टअप और वेंचर शामिल हुए। उन्हें BRICS देशों के निवेशकों, कंपनियों और कारोबारियों के सामने अपनी तकनीक दिखाने का मौका मिला।
स्किल से सीधे नौकरी तक-
BRICS का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Technical and Vocational Education and Training यानी TVET है। नई दिल्ली घोषणा में कौशल विकास और डिजिटल साक्षरता को मजबूत करने तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बदलती बाजार जरूरतों से जोड़ने की बात कही गई है। इसके लिए TVET संस्थानों और उद्योगों के बीच संबंधित मजबूत करने पर जोर दिया गया है। लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि रोजगार के लिए तैयार कार्यबल तैयार करना है। श्रम क्षेत्र में भारत ने पहले ही BRICS CONNECT शुरू किया है। इसका उद्देश्य भविष्य की स्किल, रोजगार सेवाओं, श्रम बाजार से जुड़ी जानकारी और क्षमता निर्माण में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। इसका एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि आने वाले समय में BRICS देशों में काम करने वाले युवाओं के लिए कौशल की पहचान और रोजगार से जुड़ी व्यवस्थाएं ज्यादा व्यवस्थित हों।
तो भारत को इससे क्या मिला-
यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इन घोषणाओं में भारत की उपलब्धि क्या है?
पहली उपलब्धि एजेंडा तय करने की क्षमता है। भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता को केवल बैठकें कराने तक सीमित नहीं रखा। शिक्षा में AI, STEM, यूनिवर्सिटी सहयोग, रिसर्च, स्टार्टअप और स्किल जैसे मुद्दों को एक व्यापक विकास एजेंडे से जोड़ने की कोशिश की गई। दूसरी उपलब्धि यह है कि भारत ने अपनी घरेलू ताकतों को BRICS सहयोग से जोड़ने की कोशिश की। UPI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, AI, डीप-टेक स्टार्टअप, डिजिटल कृषि, कौशल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत के अनुभव BRICS के साझा विमर्श का हिस्सा बने हैं। तीसरी उपलब्धि ग्लोबल साउथ की नेतृत्वकारी भूमिका है। BRICS के नए विस्तार के बाद समूह के भीतर अलग-अलग हित वाले देश शामिल हैं। ऐसे समूह में शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक और कौशल जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर सहमति बनाना अपने आप में महत्वपूर्ण है।
क्या यह भारत की कूटनीतिक सफलता है-
हां, लेकिन इसे केवल घोषणा के आधार पर बड़ी सफलता कहना जल्दबाजी होगी।
भारत की कूटनीतिक सफलता इस बात में ज्यादा दिखाई देती है कि उसने अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच ऐसे मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश की, जिनका सीधा संबंधित आम लोगों से है। एक तरफ BRICS में अमेरिका के साथ अलग-अलग देशों के संबंधित, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया का तनाव और भारत-चीन की अपनी प्रतिस्पर्धा जैसे जटिल मुद्दे हैं। दूसरी तरफ इसी मंच पर शिक्षा, AI, रिसर्च, स्टार्टअप, स्किल और रोजगार पर सहयोग की बात हुई। यही भारत की अध्यक्षता का एक महत्वपूर्ण पक्ष है—बड़े भू-राजनीतिक मतभेदों के बीच ऐसे क्षेत्र तलाशना जहां सभी देश साथ चल सकते हैं।
अब आगे क्या-
अब असली परीक्षा घोषणा की है।
यूनिवर्सिटी रैंकिंग की बात हुई है तो आगे इसका ढांचा तय करना होगा। Education Olympiad की चर्चा हुई है तो इसे वास्तविक कार्यक्रम में बदलना होगा। AI in Education की बात है तो शिक्षकों और छात्रों को उसके लिए तैयार करना होगा। Research Repository है तो उसमें वास्तविक शोध और संस्थानों की भागीदारी बढ़ानी होगी। Startup Innovation Fund है तो उसके वित्तीय ढांचे और संचालन की व्यवस्था स्पष्ट करनी होगी। Skills और Jobs की बात है तो उद्योग और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच वास्तविक संबंधित बनाना होगा। भारत ने BRICS की अध्यक्षता चीन को सौंप दी है। अब चुनौती यह होगी कि भारत द्वारा शुरू या आगे बढ़ाए गए इन कार्यक्रमों की गति बनी रहे और वे केवल घोषणा-पत्र के पन्नों तक सीमित न रह जाएं।
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