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ब्रिक्स की कामयाबी से बीजेपी को मिली नई ताकत, अब विपक्षी हमलों का जवाब देने की तैयारी

ब्रिक्स सम्मेलन से मजबूत हुई मोदी सरकार

BRICS Summit: ब्रिक्स 2026 की सफल मेजबानी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और बीजेपी का आत्मविश्वास बढ़ा है। तीन साल के अंदर जी-20 के बाद एक और बड़े अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन मोदी सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। बीजेपी को उम्मीद है कि ब्रिक्स की सफलता हाल के राजनीतिक झटकों से बाहर निकलने में पार्टी की मदद करेगी।

BRICS Summit: मॉनसून सत्र भी रहा प्रभावित

पिछले कुछ महीने मोदी सरकार और बीजेपी के लिए राजनीतिक तौर पर आसान नहीं रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत और असम में लगातार तीसरी बार सफलता के बाद पार्टी के पक्ष में बना माहौल नीट पेपर लीक और उसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से कमजोर पड़ गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी सरकार के लिए बड़ा झटका माना गया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर लगातार हमला बोला। इसके चलते संसद का मॉनसून सत्र भी प्रभावित हुआ। इस दौरान सरकार कोई बड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं करा पाई। इसके अलावा तीन विधेयकों से जुड़ी संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट को भी टालना पड़ा।

भारत को मिली बड़ी कूटनीतिक सफलता

ऐसे राजनीतिक माहौल के बीच ब्रिक्स सम्मेलन का सफल आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति को दिखाने वाला रहा। सदस्य देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद साझा बयान जारी होना भारतीय कूटनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि माना गया। साझा बयान में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा भी की गई, जिसे भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

BRICS Summit: ब्रिक्स सम्मेलन से मजबूत हुई मोदी सरकार
ब्रिक्स सम्मेलन से मजबूत हुई मोदी सरकार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए रूस और चीन से भारत को मिला समर्थन भी महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। इसके अलावा पिछले कई महीनों से तनाव में चल रहे संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान बातचीत हुई। ईरान के राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। वहीं, चीन के राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार तीसरे साल द्विपक्षीय बातचीत भी सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में रही। यहां तक कि विपक्षी कांग्रेस ने भी अपने आधिकारिक बयान में कुछ सवालों और शर्तों के साथ ब्रिक्स घोषणापत्र का स्वागत किया।

BRICS Summit: ओलंपिक की मेजबानी का दावा मजबूत

ब्रिक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के जरिए भारत ने एक बार फिर अपनी क्षमता साबित की है। इससे यह संदेश गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का सम्मान बढ़ा है और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत बड़े वैश्विक आयोजनों की मेजबानी करने में सक्षम है। इसका फायदा 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए भारत के दावे को भी मिल सकता है।

तीन दिनों तक आयोजन के केंद्र में रहे पीएम मोदी

मेजबान देश के प्रधानमंत्री होने के कारण नरेंद्र मोदी पूरे ब्रिक्स आयोजन के मुख्य केंद्र में रहे। दूसरे देशों के नेताओं के साथ उनके आत्मीय संबंध और उनकी सक्रियता सम्मेलन के तीनों दिनों में दिखाई दी। इन तीन दिनों के दौरान प्रधानमंत्री ने 15 राष्ट्रप्रमुखों और राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इसके अलावा कई अनौपचारिक मुलाकातें भी हुईं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकातों पर पूरी दुनिया की नजर रही। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय बैठकों और बड़े आयोजनों के जरिए देश के घरेलू राजनीतिक विमर्श की दिशा बदली हो। सितंबर 2023 में जी-20 का सफल आयोजन भी इसी तरह मोदी सरकार की विदेश नीति की उपलब्धि के रूप में सामने आया था। इससे पहले भी कई बार भारत आने वाले विदेशी नेताओं के चुनावी राज्यों में रोड शो आयोजित किए गए हैं। इसे घरेलू राजनीति के लिए कूटनीतिक उपलब्धियों का इस्तेमाल करने का सफल तरीका माना जाता है।

BRICS Summit: बीजेपी के सामने सफलता को भुनाने का मौका

अब यह बीजेपी और केंद्र सरकार पर निर्भर करेगा कि वे ब्रिक्स की सफलता को आगे किस तरह राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस्तेमाल करते हैं। बीजेपी नेताओं के मुताबिक, 17 सितंबर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर शुरू होने वाले एक महीने के सेवा संकल्प अभियान में ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता का प्रमुखता से उल्लेख किया जाएगा। इसी अवधि में 7 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी के जनसेवा के 25 साल भी पूरे हो रहे हैं। ऐसे में विदेश नीति से जुड़ी उपलब्धियों में ब्रिक्स के सफल आयोजन को भी शामिल किया जाएगा।

बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

बीजेपी ने ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर कांग्रेस के विरोध पर हमला करना भी शुरू कर दिया है। सम्मेलन शुरू होने से पहले पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के उस बयान को बीजेपी ने मुद्दा बनाया था, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि ऐसे आयोजन से भारत को आखिर क्या फायदा होगा। अब बीजेपी देशभर में ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता और इससे भारत को मिली उपलब्धियों को जनता के बीच रखने की तैयारी कर रही है।

ब्रिक्स के गाला डिनर में सिर्फ शाकाहारी खाना परोसे जाने को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के दूसरे नेताओं की प्रतिक्रिया को भी बीजेपी ने निशाना बनाया है। बीजेपी इसे नाराज फूफा वाली राजनीति से जोड़ रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस को आलोचना के लिए डिनर के मेन्यू के अलावा कोई दूसरा मुद्दा नहीं मिला।

BRICS Summit: परिसीमन और संगठनात्मक बदलाव पर नजर

इसके साथ ही परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार के अगले कदम पर भी नजर बनी हुई है। अभी संसद का सत्रावसान नहीं किया गया है। ऐसे में सरकार ने परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाने का विकल्प खुला रखा है। मोदी मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल को भी इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

नितिन नवीन की टीम के गठन के बाद बीजेपी संसदीय बोर्ड, केंद्रीय चुनाव समिति, राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद के गठन की प्रक्रिया भी जल्द पूरी होने की संभावना है। वहीं, बीजेपी ने अगले साल की शुरुआत में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।अब देखना यह होगा कि ब्रिक्स सम्मेलन से मिली इस सकारात्मक शुरुआत को बीजेपी किस तरह आगे बढ़ाती है। क्या ब्रिक्स की सफलता पार्टी और सरकार को पिछले कुछ महीनों में मिले राजनीतिक झटकों से उबरने में मदद करेगी, यह आने वाले समय में साफ होगा।