VIRAL VIDEO NEWS: ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में वह एक हिंदू संत के सामने झुकते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर दावा किया जाने लगा कि ईरान के राष्ट्रपति ने भारतीय संत के पैर छुए।
लेकिन वायरल वीडियो की तस्वीर को पूरी घटना मान लेना सही नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों और ईरानी पक्ष से सामने आए स्पष्टीकरण के मुताबिक, पेजेशकियान संत के पैर छूने के लिए नहीं, बल्कि नीचे गिरी एक चिट्ठी या दस्तावेज उठाने के लिए झुके थे। यानी जिस घटना को सोशल मीडिया पर धार्मिक सम्मान के तौर पर पेश किया गया, उसका संदर्भ कुछ और था।
सवाल-1: आखिर वीडियो में हुआ क्या था?
नई दिल्ली के ओबेरॉय होटल में एक अंतर-धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान पेजेशकियान की मुलाकात हिंदू आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु स्वामी सतीश आचार्य महाराज से हुई। वायरल क्लिप में दोनों के बीच बातचीत और हाथ मिलाने के बाद पेजेशकियान अचानक नीचे की तरफ झुकते नजर आते हैं। वीडियो का यही हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। कई यूजर्स ने इसे इस तरह पेश किया कि ईरान जैसे शिया बहुल देश के राष्ट्रपति ने भारत में हिंदू संत के चरण स्पर्श किए। यहीं से वीडियो को लेकर दावा और वास्तविक घटना के बीच अंतर पैदा हुआ।
VIRAL VIDEO NEWS: सवाल-2: क्या पेजेशकियान ने वाकई संत के पैर छुए?
उपलब्ध स्पष्टीकरण के मुताबिक नहीं। ईरानी दूतावास से जुड़े सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया कि बातचीत के दौरान एक कागज या दस्तावेज नीचे गिर गया था। पेजेशकियान उसी कागज को उठाने के लिए नीचे झुके थे। यानी वीडियो में उनका झुकना जरूर दिखाई देता है, लेकिन सिर्फ उस दृश्य के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना कि उन्होंने संत के पैर छुए, सही नहीं है। यह मामला इस बात का उदाहरण भी है कि कुछ सेकंड की वायरल क्लिप पूरे घटनाक्रम का अर्थ बदल सकती है।
सवाल-3: वीडियो में दिख रहे हिंदू संत कौन हैं?
वीडियो में नजर आने वाले जगद्गुरु स्वामी सतीश आचार्य महाराज उत्तर प्रदेश के कानपुर के कल्याणपुर स्थित प्रेमेश्वर धाम से जुड़े आध्यात्मिक गुरु हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली की ओर से आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कार्यक्रम में धार्मिक सद्भाव और विभिन्न धर्मों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की बात भी रखी। यानी यह मुलाकात किसी अचानक हुई सार्वजनिक घटना का हिस्सा नहीं थी, बल्कि एक ऐसे कार्यक्रम का हिस्सा थी जिसमें धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को आमंत्रित किया गया था।
VIRAL VIDEO NEWS: सवाल-4: ईरान के राष्ट्रपति हिंदू संतों और दूसरे धार्मिक नेताओं से क्यों मिले?
पेजेशकियान की भारत यात्रा सिर्फ BRICS की औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं थी। यात्रा के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय धार्मिक, सामाजिक और बौद्धिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ भी संवाद किया। ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य सिर्फ सरकारी स्तर की बातचीत तक संबंधों को सीमित रखने के बजाय people-to-people contact यानी लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना होता है। भारत और ईरान के संबंधों में संस्कृति, सभ्यता, व्यापार और ऐतिहासिक संपर्क की लंबी पृष्ठभूमि रही है। इसलिए धार्मिक और सांस्कृतिक संवाद को भी कूटनीति के एक हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।

सवाल-5: फिर सोशल मीडिया पर पैर छूने का दावा इतना वायरल क्यों हुआ?
इसकी सबसे बड़ी वजह वीडियो का छोटा हिस्सा है। वीडियो में पेजेशकियान नीचे की तरफ झुकते दिखाई देते हैं और उनके सामने संत मौजूद होते हैं। अगर वीडियो का इससे पहले और बाद का संदर्भ न देखा जाए तो दर्शक आसानी से अलग अर्थ निकाल सकता है। सोशल मीडिया पर इसी दृश्य के आधार पर धार्मिक और सांस्कृतिक सम्मान से जुड़े दावे शुरू हो गए। लेकिन किसी वायरल वीडियो की व्याख्या करते समय सिर्फ दृश्य नहीं, बल्कि घटना का पूरा संदर्भ, प्रत्यक्षदर्शियों का बयान और संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण भी देखना जरूरी होता है।
VIRAL VIDEO NEWS: सवाल-6: इस घटना का भारत-ईरान रिश्तों से क्या संबंध है?
भारत और ईरान के बीच संबंध केवल मौजूदा कूटनीतिक जरूरतों पर आधारित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संपर्क रहे हैं। हालांकि आज दोनों देशों के रिश्ते भू-राजनीति से भी प्रभावित होते हैं। भारत के लिए ईरान चाबहार बंदरगाह, मध्य एशिया तक संपर्क और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं ईरान भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को बनाए रखने में रुचि रखता है। इसलिए BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच के दौरान दोनों देशों के बीच राजनीतिक बातचीत के साथ सांस्कृतिक संपर्क भी कूटनीतिक महत्व रखता है।
पेजेशकियान का बड़ा संदेश भी रहा चर्चा में
दिल्ली में BRICS सम्मेलन के दौरान पेजेशकियान ने पश्चिम एशिया की स्थिति और ईरान पर दबाव से जुड़े मुद्दों पर भी कड़ा रुख रखा। उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ जारी तनाव के बीच ईरान के रुख को मजबूती से रखा। BRICS नई दिल्ली घोषणापत्र में भी पश्चिम एशिया के हालात को लेकर चिंता जताई गई और संयम तथा बातचीत के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर दिया गया। इस लिहाज से पेजेशकियान का दिल्ली दौरा सिर्फ वायरल वीडियो की वजह से चर्चा में नहीं रहा। इसके पीछे कूटनीति, पश्चिम एशिया का तनाव और भारत-ईरान संबंध भी बड़े मुद्दे थे।
VIRAL VIDEO NEWS: वीडियो कुछ और दिखाता है, संदर्भ कुछ और
पेजेशकियान के वायरल वीडियो को देखकर यह दावा किया गया कि उन्होंने हिंदू संत के पैर छुए। लेकिन उपलब्ध स्पष्टीकरण इस दावे की पुष्टि नहीं करता। वीडियो में पेजेशकियान का झुकना साफ दिखाई देता है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह जमीन पर गिरे कागज/दस्तावेज को उठाने के लिए झुके थे। इसलिए इस घटना को “ईरानी राष्ट्रपति ने हिंदू संत के पैर छुए” के रूप में पेश करना भ्रामक होगा। पूरी घटना का संदर्भ देखने पर मामला धार्मिक चरण स्पर्श से ज्यादा एक सांस्कृतिक मुलाकात और वायरल वीडियो की गलत व्याख्या का नजर आता है।
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