BIHAR BREAKING NEWS: मुजफ्फरपुर में करीब आठ साल पुराने हथियार और डकैती की साजिश से जुड़े मामले में अदालत ने पुलिसकर्मियों की लगातार गैरहाजिरी पर सख्त रुख अपनाया है। गवाही के लिए बार-बार बुलाए जाने के बावजूद कोर्ट नहीं पहुंचने पर 4 दरोगा समेत 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है। ADJ-11 डॉ. किशोर कुणाल ने 10 सितंबर को आदेश जारी करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों को 28 अक्टूबर तक गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।
मामला सरैया थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2018 में पुलिस ने एक छापेमारी के दौरान तीन लोगों को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में कुल छह लोगों को आरोपी बनाया गया था और केस का ट्रायल अभी अदालत में चल रहा है। छापेमारी में शामिल पुलिसकर्मियों को इस मामले में गवाह के तौर पर अदालत में पेश होना था, लेकिन कई तारीखों के बाद भी उनकी पेशी नहीं हो सकी।
सवाल: आखिर कोर्ट को इतना सख्त कदम क्यों उठाना पड़ा?
मामले में पुलिसकर्मियों को गवाही के लिए अदालत के सामने उपस्थित होना था। इसके लिए कोर्ट ने पहले 8 मई 2025 को समन जारी किया था। इसके बावजूद जब संबंधित पुलिसकर्मी अदालत में पेश नहीं हुए तो 20 अगस्त को जमानती वारंट जारी किया गया। जमानती वारंट के बाद भी पुलिस गवाहों की पेशी नहीं होने पर अदालत ने अब गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया। अदालत ने मुजफ्फरपुर SSP कार्यालय को निर्देश दिया है कि संबंधित पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर 28 अक्टूबर तक कोर्ट में पेश किया जाए। यानी कोर्ट की कार्रवाई एक ही बार में नहीं हुई। पहले समन, फिर जमानती वारंट और उसके बाद गैर-जमानती वारंट तक मामला पहुंचा।
BIHAR BREAKING NEWS: सवाल: 2018 में ऐसा क्या हुआ था?
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 17 सितंबर 2018 की रात करीब 9:30 बजे सरैया थाना पुलिस की टीम ने मणिकपुर स्थित जगत सिंह हाई स्कूल के मैदान में छापेमारी की थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग हथियारों के साथ डकैती की साजिश रच रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान पुलिस ने राहुल कुमार यादव उर्फ क्रांति यादव, मोहम्मद अंजार और मुकेश कुमार राम को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों के पास से लोडेड देसी पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। वहीं अनिल कुमार, गुड्डू सहनी और राजेश राय मौके से फरार हो गए थे। मामले में कुल छह लोगों को आरोपी बनाया गया।
सवाल: गवाही और जब्त हथियार अदालत के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?
इस मामले में जिन पुलिसकर्मियों ने छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई की थी, उन्हें अदालत में गवाह के तौर पर अपना बयान दर्ज कराना था। उनकी गवाही से यह स्पष्ट होना था कि पुलिस टीम को सूचना कैसे मिली, छापेमारी कैसे की गई, किन लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से क्या बरामद हुआ। इसके अलावा पुलिस द्वारा जब्त किए गए हथियार और अन्य साक्ष्य को भी ट्रायल के दौरान अदालत के सामने पेश किया जाना था। जब संबंधित पुलिस गवाह लगातार अदालत में उपस्थित नहीं हुए तो मामले की सुनवाई प्रभावित हुई। इसी के बाद कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी करने का फैसला लिया।
BIHAR BREAKING NEWS: सवाल: कोर्ट के आदेश की जानकारी किसे दी गई?
अदालत ने अपने आदेश की प्रति सरैया थाना प्रभारी और मुजफ्फरपुर SSP कार्यालय को भेजने का निर्देश दिया है।अब पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट की तामील कर उन्हें अदालत के सामने पेश कराया जाए। इसके लिए अदालत ने 28 अक्टूबर की समय सीमा निर्धारित की है।

तत्कालीन SI का क्या कहना है?
मामले में सरैया थाने के तत्कालीन सब इंस्पेक्टर मोहम्मद अलाउद्दीन भी संबंधित पुलिसकर्मियों में शामिल बताए गए हैं। फिलहाल वह खगड़िया में GRP SHO के पद पर तैनात हैं।उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि ऐसे मामलों को पुलिस की लीगल टीम देखती है। उनका कहना था कि उन्हें लीगल टीम की ओर से अदालत में पेश होने के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उनके मुताबिक, अगर उन्हें पेशी की जानकारी ही नहीं मिली तो वह कोर्ट में कैसे पहुंचते।
BIHAR BREAKING NEWS: अब आगे क्या होगा?
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। अदालत ने संबंधित पुलिसकर्मियों को 28 अक्टूबर तक गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया है। अगली कार्रवाई में यह देखा जाएगा कि पुलिस वारंट की तामील कैसे कराती है और संबंधित पुलिसकर्मियों को अदालत के सामने कब पेश किया जाता है।
2018 के केस से 2026 तक मामला क्यों पहुंचा?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि मामला करीब आठ साल पुराना है, लेकिन उसका ट्रायल अभी जारी है। अदालत में गवाहों की पेशी और साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर लाना मुकदमे की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस मामले में कोर्ट ने पहले समन जारी किया, उसके बाद जमानती वारंट और अंत में गैर-जमानती वारंट जारी किया। इससे साफ है कि अदालत ने पुलिस गवाहों की लगातार गैरहाजिरी को गंभीरता से लिया है। अब 28 अक्टूबर की तारीख महत्वपूर्ण होगी, जब अदालत के निर्देश के मुताबिक इन पुलिसकर्मियों की पेशी और वारंट की तामील की स्थिति सामने आएगी।
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